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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद विरोधी दलों को वंशवाद प्रभावित होने का डर: डॉ. जितेंद्र
Mon, 30 Sep 2019 09:33 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कठुआ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कठुआ
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 30 Sep 2019 09:33 PM IST
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डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
- फोटो : अमर उजाला
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स्वायत्ता और सेल्फ रूल का राग अलापने वाली पार्टियों ने जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती को कभी स्थापित नहीं होने दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनका वंशवाद प्रभावित होगा। राज्य में ब्लॉक विकास परिषद चुनावों की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए पीएमओ राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात कही। वह सोमवार को डॉ. केके बिड़ला पार्क के उद्घाटन समारोह में पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि अनुछेद 370 के हटने के बाद हालात बदले हैं और लोगों को 31 अक्टूबर के बाद दो माह के भीतर ही पता चल जाएगा कि उन्हें बरसों किन अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव के लिए तैयार है लेकिन बहिष्कार वहीं दल करते हैं जिन्हें अपनी पीढ़ियों की राजनीति पर खतरा मंडराता दिखाई देता है। यही वजह है कि राज्य में लंबे अर्से तक बीडीसी चुनाव नहीं करवाए गए। उन्होंने कहा कि अब प्रजातंत्र जमीन से उठ रहा है। यही उन्हें रास नहीं आ रहा है।
राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की बहाली पर कहा कि यह उनके अधिकार में नहीं आता लेकिन जम्मू कश्मीर में जो भी हो रहा है वह लोकहित में ही है। राजनीतिक आधार पर होने वाले बीडीसी चुनाव के दौरान नेताओं की नजरबंदी को लेकर जवाब में उन्होंने कहा कि बीडीसी चुनाव में हिस्सा लेना वाला कोई भी उम्मीदवार नजरबंद नहीं है।
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उन्होंने कहा कि अनुछेद 370 के हटने के बाद हालात बदले हैं और लोगों को 31 अक्टूबर के बाद दो माह के भीतर ही पता चल जाएगा कि उन्हें बरसों किन अधिकारों से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव के लिए तैयार है लेकिन बहिष्कार वहीं दल करते हैं जिन्हें अपनी पीढ़ियों की राजनीति पर खतरा मंडराता दिखाई देता है। यही वजह है कि राज्य में लंबे अर्से तक बीडीसी चुनाव नहीं करवाए गए। उन्होंने कहा कि अब प्रजातंत्र जमीन से उठ रहा है। यही उन्हें रास नहीं आ रहा है।
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राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की बहाली पर कहा कि यह उनके अधिकार में नहीं आता लेकिन जम्मू कश्मीर में जो भी हो रहा है वह लोकहित में ही है। राजनीतिक आधार पर होने वाले बीडीसी चुनाव के दौरान नेताओं की नजरबंदी को लेकर जवाब में उन्होंने कहा कि बीडीसी चुनाव में हिस्सा लेना वाला कोई भी उम्मीदवार नजरबंद नहीं है।
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