मसर्रत की रिहाई पर सियासत ठीक नहीं: सीपीआई
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अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई को रियासत और देश के विभिन्न हिस्सों में बेवजह तूल दिए जाने पर सवाल उठाते हुए रियासत में सीपीआई (एम) के विधायक एमवाई तारिगामी ने गंभीर आपराधिक मामले न होने वाले सियासी कैदियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिहा करने की जरूरत दर्शाई है।
तारिगामी ने वीरवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्र की एकता और सुरक्षा इतनी कमजोर नहीं हो सकती कि किसी एक शख्स की रिहाई से उसके लिए खतरा पैदा हो जाए।
उन्होंने कहा कि रियासत में लोगों के प्रमुख मुद्दे रोजगार, बिजली, पानी, सड़क, भ्रष्टाचार, स्वाइन फ्लू से रोकथाम है और इन पर काम करने के बजाय मसर्रत आलम की रिहाई पर ही सियासत होते रहना ठीक नहीं है।
'पब्लिक सेफ्टी एक्ट का दुरुपयोग होता है'
तारिगामी ने अनुच्छेद 370 पर संसद में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बयान की भाजपा अनुच्छेद पर अपने रुख पर कायम है और फिलहाल नंबर न होने की वजह से भाजपा इसे हटा नहीं सकती, को गंभीर बताया।
अनुच्छेद 370 को पहले ही कमजोर किया जा चुका है। इसे केंद्र सरकार नहीं हटा सकती। गिलानी के पाकिस्तान उच्चायुक्त से नई दिल्ली में मिलने के सवाल पर तारिगामी ने कहा कि ऐसी मुलाकातें पहले भी होती रही हैं।
इसको तूल देना ठीक नहीं है। जम्मू कश्मीर सियासी मसला है और इसका राजनीतिक हल बातचीत के माध्यम से ही निकल सकता है। एक अन्य सवाल के जवाब में तारिगामी ने कहा कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट का दुरुपयोग होता रहा है।