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जम्मू-कश्मीरः डोमिसाइल प्रमाणपत्र पाकर लोग बोले- अब मिला बराबरी का हक, गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुए

Sun, 28 Jun 2020 01:45 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sun, 28 Jun 2020 01:45 AM IST
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People said by getting Domicile certificate now freed from shackles of slavery, dream came true
People said by getting Domicile certificate - फोटो : अमर उजाला

डोमिसाइल प्रमाणपत्र पाकर खुश पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी, वाल्मीकि और गोरखा समाज के लोगों ने कहा कि सही मायने में अब गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुए हैं। अब बराबरी का हक मिला है। कई सरकारों ने वादे किए पर वास्तविक रूप में अब जाकर सपना साकार हुआ है।

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वाल्मीकि

मंडलायुक्त कार्यालय में डोमिसाइल प्रमाणपत्र वितरण के लिए आयोजित शिविर में आरएस पुरा, बिश्नाह, बाहु व जम्मू दक्षिण के लोग भी शामिल हुए। नए डोमिसाइल नियम के तहत जम्मू-कश्मीर में 15 साल तक निवास करने वाले व्यक्ति या फिर सात साल तक पढ़ाई करने वाले को भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। 
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प्रदेश में पढ़ाई करने वालों के लिए शर्त यह है कि संबंधित व्यक्ति ने जम्मू-कश्मीर के शिक्षण संस्थानों में दसवीं व बारहवीं की परीक्षा दी हो। केंद्र सरकार के अधिकारियों के बच्चे, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों, सार्वजनिक उपक्रमों जैसे बैंक, केंद्रीय विश्वविद्यालय व पंजीकृत शोध संस्थाओं के अधिकारी जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में दस साल तक नौकरी की हो, उन्हें व उनके बच्चों को भी डोमिसाइल प्रमाणपत्र के योग्य माना गया है। पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों, सफाई कर्मचारियों और जम्मू-कश्मीर के बाहर ब्याही गई यहां की बेटियों के बच्चों को भी अब डोमिसाइल सर्टिफिकेट के योग्य माना गया है।

मोदी सरकार ने इतिहास रच दिया- डॉ. जितेंद्र सिंह

70 साल की गुलामी के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को नागरिकता मिली है। मोदी सरकार ने इतिहास रच दिया है। अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद ही इन लोगों को इंसाफ मिल सका है। अब इन शरणार्थियों के चेहरे पर खुशी झलकेगी। साथ ही वे भी अपने को मुख्यधारा का हिस्सा महसूस करेंगे। उनके बच्चों को नौकरी तथा केंद्र की अन्य सुविधाओं का भी हक मिल सकेगा। ये बात डॉ. जितेंद्र सिंह (पीएमओ में राज्यमंत्री), ने कही।

पिछले सात दशक से जम्मू कश्मीर में रह रहे शरणार्थियों, वाल्मीकि और गोरखा समाज के लोगों को नागरिकता के अधिकार से वंचित रखा गया था। उनके बच्चे किसी भी सरकारी सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। वे नौकरी के अधिकार से भी वंचित थे। अब उन्हें उनका हक मिला है। -लब्बा राम गांधी, अध्यक्ष-पश्चिमी पाक शरणार्थी एक्शन कमेटी

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