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Jammu News: वकीलों, शिक्षाविदों ने पीओजेके पर संसद के प्रस्ताव पर की चर्चा
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जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के वकीलों ने पीओजेके पर संसद के प्रस्ताव पर की चर्चा
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कानूनी पेशेवरों, शिक्षाविदों, मीडियाकर्मियों और विद्वानों के एक स्वैच्छिक संगठन रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप (आरएएजी) ने शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) पर 22 फरवरी 1994 को संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर बार रूम में चर्चा हुई। आरएएजी के संयोजक एडवोकेट दीपक शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में सम्मेलन के एजेंडे को उजागर किया। उन्होंने प्रतिभागी को कानूनी और सामाजिक अनुसंधान गतिविधियों के क्षेत्र में आरएएजी की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
अधिवक्ता राकेश भट्ट ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उस पर भारत के रुख के संबंध में 22 फरवरी 1994 को पारित भारतीय संसद के प्रस्ताव को पढ़ा। उन्होंने प्रतिभागियों को सूचित किया कि कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर बार-बार भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा पीओजेके के भारतीय क्षेत्र पर इस अवैध कब्जे के खिलाफ अपना दृढ़ रुख और संकल्प दोहराया है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एडवोकेट रणजीत सिंह जम्वाल, जो सम्मेलन के मुख्य वक्ता थे, उन्होंने पीओजेके पर भारतीय संसद के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को बताया कि आतंकवादी गतिविधियों की शुरुआत के बाद 1990 के दशक में जम्मू कश्मीर और के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में स्थित शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने, हथियारों की आपूर्ति, जम्मू और कश्मीर में विदेशी भाड़े के सैनिकों सहित प्रशिक्षित आतंकवादियों की घुसपैठ में पाकिस्तान की भूमिका पर चिंतित, भारत की संसद द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था।
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अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में कार्यक्रम में अपने विचार साझा करने के लिए वकीलों की सराहना की। भाग लेने वाले वकीलों में प्रमुख रुप से गौरव जम्वाल, बिंदुसार अबरोल, विकास पंकज, दिवाकर शर्मा, राहुल सदोत्रा, राकेश भट्ट, नरेश चौधरी, संदीप सिंह, करण पाराशर, पवन चौधरी, भरत चौधरी, आदित्य रैना और अन्य शामिल रहे।
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जम्मू। कानूनी पेशेवरों, शिक्षाविदों, मीडियाकर्मियों और विद्वानों के एक स्वैच्छिक संगठन रिसर्च एंड एडवोकेसी ग्रुप (आरएएजी) ने शुक्रवार को पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) पर 22 फरवरी 1994 को संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर बार रूम में चर्चा हुई। आरएएजी के संयोजक एडवोकेट दीपक शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में सम्मेलन के एजेंडे को उजागर किया। उन्होंने प्रतिभागी को कानूनी और सामाजिक अनुसंधान गतिविधियों के क्षेत्र में आरएएजी की भूमिका के बारे में जानकारी दी।
अधिवक्ता राकेश भट्ट ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उस पर भारत के रुख के संबंध में 22 फरवरी 1994 को पारित भारतीय संसद के प्रस्ताव को पढ़ा। उन्होंने प्रतिभागियों को सूचित किया कि कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्मों पर बार-बार भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा पीओजेके के भारतीय क्षेत्र पर इस अवैध कब्जे के खिलाफ अपना दृढ़ रुख और संकल्प दोहराया है।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एडवोकेट रणजीत सिंह जम्वाल, जो सम्मेलन के मुख्य वक्ता थे, उन्होंने पीओजेके पर भारतीय संसद के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि और संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को बताया कि आतंकवादी गतिविधियों की शुरुआत के बाद 1990 के दशक में जम्मू कश्मीर और के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में स्थित शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने, हथियारों की आपूर्ति, जम्मू और कश्मीर में विदेशी भाड़े के सैनिकों सहित प्रशिक्षित आतंकवादियों की घुसपैठ में पाकिस्तान की भूमिका पर चिंतित, भारत की संसद द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया था।
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अधिवक्ता दीपक शर्मा ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में कार्यक्रम में अपने विचार साझा करने के लिए वकीलों की सराहना की। भाग लेने वाले वकीलों में प्रमुख रुप से गौरव जम्वाल, बिंदुसार अबरोल, विकास पंकज, दिवाकर शर्मा, राहुल सदोत्रा, राकेश भट्ट, नरेश चौधरी, संदीप सिंह, करण पाराशर, पवन चौधरी, भरत चौधरी, आदित्य रैना और अन्य शामिल रहे।