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जम्मू संभाग के रहबर-ए-जिरात के साथ भेदभाव
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Wed, 19 Nov 2014 01:21 AM IST
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जम्मू एंड कश्मीर एग्रीकल्चरल टेकभनोक्रेट एसोसिएशन की बैठक का आयोजन मंगलवार को राज्य प्रधान डा. सुरेंद्र रडोत्रा की अध्यक्षता में प्रेस क्लब में हुआ, जिसमें रहबर-ए-जेरात को स्थाई कर्मचारी बनाने को लेकर जारी की गई सूची में जम्मू संभाग के साथ किए गए भेदभाव को लेकर चर्चा की और सरकार से अपील की जम्मू के रहबर-ए-जिरात को भी जल्द स्थाई किया जाए।
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बैठक को संबोधित करते हुए सुरेंद्र रडोत्रा ने कहा कि कैबिनेट के निर्णय को जम्मू व कश्मीर दोनों संभाग के कुल 881 उम्मीदवारों ने कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस जनक राज कोतवाल ने फैसला सुनाया था कि 14 अक्तूबर 2014 तक सभी के केस निपटाकर सूची जारी की जाए। लेकिन जो 440 रहबर-ए-जिरात की सूची जारी की वह सभी कश्मीर संभाग के हैं।
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एक बार फिर से राज्य सरकार ने जम्मू संभाग के साथ भेदभाव किया है। डा. सुरेंद्र ने राज्य के मुख्य मंत्री से अपील की कि जल्द से जल्द जम्मू संभाग के रहबर-ए-जेरात की भी सूची जारी की जाए। इस मौके पर प्रांतीय प्रधान विनोद शर्मा, मंजीत सिंह, राजीव सिंह चिब, मोहम्मद अनवर, शकील काजी, रशीद, अमित गुप्ता, वैष्णो व अन्य कई पदाधिकारी व सदस्य मौजूद थे।
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