मंत्री जी को पता नहीं, मरीजों के निवाले पर संकट
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जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों के निवाले पर संकट खड़ा हो गया है। मरीजों को दी जाने वाली डाइट सुविधा के लिए अस्पताल प्रशासन पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये की देनदारी है। डाइट स ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल प्रशासन को नोटिस देकर चेताया गया है कि अगर शीघ्र बकाया राशि जारी नहीं की जाती तो डाइट सेवा पर ताला लगा दिया जाएगा। अस्पताल के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल ने नोटिस की पुष्टि करते हुए बताया कि बकाया राशि पर फिलहाल कुछ नहीं हो पाया है।
लेकिन प्रयास किए जा रहे हैं। डाइट सेवा बंद होने की सूरत में वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ताज मोहिउद्दीन का कहना है कि उनके नोटिस में ऐसी बात नहीं है। लेकिन अगर ऐसा है तो उचित कदम उठाए जाएंगे।
अस्पताल प्रशासन को ठेकेदारों का नोटिस
सूत्रों के अनुसार डाइट सेवा के लिए जीएमसी अस्पताल पर 60 लाख, एसएमजीएस पर 50 लाख, सीडी अस्पताल पर 29 लाख और साइक्रेटरी अस्पताल पर 10 लाख रुपये की देनदारी बन गई है। इसी तरह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर भी देनदारी बढ़ गई है।
इसमें जीएमसी, एसएमजीएस और साइक्रेटरी अस्पताल से 5-7 माह और सीडी से एक साल से ज्यादा समय से भुगतान नहीं हो पाया है। जीएमसी सहित अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों में रोजाना सुबह, दोपहर और रात की शिफ्ट में 1000-1100 के बीच मरीजों को निशुल्क डाइट की सुविधा मुहैया करवाई जा रही है।
इसमें सुबह के नाश्ते में आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच, चार ब्रेड पीस, दोपहर को एक दाल, सब्जी, चार चपाती, चावल तथा रात को चावल, चार चपाती और एक सब्जी दी जाती है। हफ्ते में दो दिन पनीर की सब्जी भी दी जाती है। इसमें औसतन प्रति मरीज पर एक दिन की डाइट पर साठ रुपये खर्च आता है।
कभी भी बंद हो सकती है मरीजों की डाइट
इन अस्पतालों में दूरवर्ती इलाकों से पहुंचने वाले मरीजों को डाइट सेवा काफी राहत देती है। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने से कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया जा रहा है और उन पर बाजार का कर्ज बढ़ गया है। बताया जाता है कि ठेकेदारों ने जीएमसी प्रशासन को 15 अक्तूबर का अल्टीमेटम दिया था।
लेकिन 17 अक्तूबर को स्वास्थ्य मंत्री के जीएमसी के दौरे में इस मसले पर बात होने की उम्मीद है। वहीं, जीएमसी के प्लान और नान प्लान हेड में इतनी बड़ी राशि नहीं है जिससे तत्काल भुगतान किया जा सके। जिससे आने वाले दिनों में मरीजों की डाइट पर संकट बढ़ना लगभग तय है।
इससे पहले सितंबर 2012 में भी डेढ़ करोड़ रुपये की देनदारी हो जाने से डाइट और लांड्री के ठेकेदारों ने दोनों यूनिट ठप करने पर नोटिस दिया था। लेकिन, कुछ भुगतान और आश्वासनों पर किसी तरह से काम चल रहा है।