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जम्मू कश्मीर: डिप्रेशन बन रहा सुसाइड का कारण, 2022 में 753 और अब 781 केस रिपोर्ट
Sun, 03 Dec 2023 05:45 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Dec 2023 05:45 PM IST
सार
जीएमसी जम्मू में भी रोजाना औसतन 2 से 3 मामले आ रहे हैं। संभाग में मासिक स्तर पर राजोरी और पुंछ से 40 से 50 प्रतिशत मामले हैं। हालांकि ये वे हैं जो अस्पतालों से रिपोर्ट हो रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोविड के बाद डिप्रेशन (अवसाद) और एंजाइटी (चिंता विकार) के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। खासतौर पर डिप्रेशन बढ़ने से जम्मू संभाग के दस जिलों में आत्महत्या के लिए लोगों ने जहरीला पदार्थ निगला है। नहर या नदी में कूद कर जान देने के मामले कम हैं।
2022 में जिला स्तरीय आपात केंद्रों पर जहरीला पदार्थ निगल कर पहुंचने के 753 मामले रिपोर्ट हुए थे जो इस साल 11 माह में ही 781 आ गए। आत्महत्या के लिए 80 प्रतिशत मामलों में डिप्रेशन जिम्मेदार माना जा रहा है। उत्पादक आयु समूह (प्रोडक्टिव आयु वर्ग) में 15 से 25 आयु वर्ग के किशोर और युवा अधिक प्रभावित हैं। संभाग स्तर पर उधमपुर और राजोरी में स्थिति खराब है।
स्वास्थ्य विभाग के अधीन आपात केंद्रों में हर माह औसतन 100 मामले जहरीला पदार्थ निगलने के पहुंच रहे हैं। जीएमसी जम्मू में भी रोजाना औसतन 2 से 3 मामले आ रहे हैं। संभाग में मासिक स्तर पर राजोरी और पुंछ से 40 से 50 प्रतिशत मामले हैं। हालांकि ये वे हैं जो अस्पतालों से रिपोर्ट हो रहे हैं। जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल का मुख्य कारण बाजार में आसानी से विभिन्न तरह के ऐसे पदार्थों की उपलब्धता है।
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मनोरोग अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सक डॉ. राकेश बनाल के अनुसार आत्महत्या के लिए सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है। मैनिक डिप्रेशन के साथ तनाव आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है। युवाओं में नौकरी चले जाना, परीक्षा में असफल होना, समाज का समर्थन न मिलना, कैंसर जैसी बीमारियों में दर्द को नहीं सह पाना आदि आत्महत्या के कारण हैं, जिसके केस अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं।
भारत में हर साल 1.36 लाख लोग कर रहे हैं आत्महत्या
दुनिया में हर साल आठ लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जिसमें भारत में 17 प्रतिशत (1.36 लाख) मामले हैं। कोविड की पहली लहर के दौरान देश में करीब डेढ़ लाख मौतें हुई थीं और उसके बाद हर साल इतनी ही आत्महत्याएं हो रही हैं। उत्पादक आयु समूह में सड़क हादसे के बाद आत्महत्या दूसरा बड़ा कारण है। पिछले साल अक्तूबर में प्रकाशित लेनसेट स्टडी के अनुसार 2020 में कोविड के बाद भारत में डिप्रेशन और एंजाइटी के मामलों में 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के अनुसार भारत में आत्महत्या के मामलों में 10 प्रतिशत वृद्धि हुई।
ऐसे बच जाएंगी जिंदगियां
1. बाजार में विभिन्न तरह के जहरीले पदार्थों की उपलब्धता को बंद किया जाए।
2. सुसाइड बिंदुओं को बैरिकेट आदि से कवर कर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
3. अगर आपका कोई साथी आत्महत्या की बातें कर रहा है तो उसे गंभीरता से लें और मनोचिकित्सक तक ले जाएं।
4. साथी में डिप्रेशन के लक्षण को नजरअंदाज न करें और उन्हें मानसिक रूप से समर्थन दें।
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2022 में जिला स्तरीय आपात केंद्रों पर जहरीला पदार्थ निगल कर पहुंचने के 753 मामले रिपोर्ट हुए थे जो इस साल 11 माह में ही 781 आ गए। आत्महत्या के लिए 80 प्रतिशत मामलों में डिप्रेशन जिम्मेदार माना जा रहा है। उत्पादक आयु समूह (प्रोडक्टिव आयु वर्ग) में 15 से 25 आयु वर्ग के किशोर और युवा अधिक प्रभावित हैं। संभाग स्तर पर उधमपुर और राजोरी में स्थिति खराब है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधीन आपात केंद्रों में हर माह औसतन 100 मामले जहरीला पदार्थ निगलने के पहुंच रहे हैं। जीएमसी जम्मू में भी रोजाना औसतन 2 से 3 मामले आ रहे हैं। संभाग में मासिक स्तर पर राजोरी और पुंछ से 40 से 50 प्रतिशत मामले हैं। हालांकि ये वे हैं जो अस्पतालों से रिपोर्ट हो रहे हैं। जहरीले पदार्थ के इस्तेमाल का मुख्य कारण बाजार में आसानी से विभिन्न तरह के ऐसे पदार्थों की उपलब्धता है।
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मनोरोग अस्पताल में कार्यरत मनोचिकित्सक डॉ. राकेश बनाल के अनुसार आत्महत्या के लिए सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है। मैनिक डिप्रेशन के साथ तनाव आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है। युवाओं में नौकरी चले जाना, परीक्षा में असफल होना, समाज का समर्थन न मिलना, कैंसर जैसी बीमारियों में दर्द को नहीं सह पाना आदि आत्महत्या के कारण हैं, जिसके केस अधिक रिपोर्ट हो रहे हैं।
भारत में हर साल 1.36 लाख लोग कर रहे हैं आत्महत्या
दुनिया में हर साल आठ लाख लोग आत्महत्या कर रहे हैं, जिसमें भारत में 17 प्रतिशत (1.36 लाख) मामले हैं। कोविड की पहली लहर के दौरान देश में करीब डेढ़ लाख मौतें हुई थीं और उसके बाद हर साल इतनी ही आत्महत्याएं हो रही हैं। उत्पादक आयु समूह में सड़क हादसे के बाद आत्महत्या दूसरा बड़ा कारण है। पिछले साल अक्तूबर में प्रकाशित लेनसेट स्टडी के अनुसार 2020 में कोविड के बाद भारत में डिप्रेशन और एंजाइटी के मामलों में 35 प्रतिशत तक वृद्धि हुई। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा के अनुसार भारत में आत्महत्या के मामलों में 10 प्रतिशत वृद्धि हुई।
ऐसे बच जाएंगी जिंदगियां
1. बाजार में विभिन्न तरह के जहरीले पदार्थों की उपलब्धता को बंद किया जाए।
2. सुसाइड बिंदुओं को बैरिकेट आदि से कवर कर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
3. अगर आपका कोई साथी आत्महत्या की बातें कर रहा है तो उसे गंभीरता से लें और मनोचिकित्सक तक ले जाएं।
4. साथी में डिप्रेशन के लक्षण को नजरअंदाज न करें और उन्हें मानसिक रूप से समर्थन दें।