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Jammu: रक्षा विशेषज्ञ गौर बोले- भारतीय सेना की बराबरी करना बंद करे पाकिस्तान, भुखमरी और बेरोजगारी पर करे फोकस
Sun, 08 Sep 2024 01:56 PM IST
Digvijay Singh
एएनआई, जम्मू
एएनआई, जम्मू
Published by: Digvijay Singh
Updated Sun, 08 Sep 2024 01:56 PM IST
सार
विशेषज्ञ ने कहा कि कश्मीर भारत का हिस्सा है और दुनिया ने इसे स्वीकार किया है, लेकिन अब भी, पाकिस्तान द्वारा लड़े गए सभी युद्धों और हार के बाद भी, वे कश्मीर के बारे में बहस कर रहे हैं।
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भारतीय रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर द्वारा हाल ही में कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना की भूमिका को स्वीकार किए जाने के बाद, भारतीय रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर ने इस घटनाक्रम पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि यह कश्मीर के साथ पाकिस्तान की निरंतर रंजिश को रेखांकित करता है। जो दर्शाता है कि 75 वर्षों के बाद भी, उनके लिए यह मुद्दा अनसुलझा है। रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि यह सही समय है कि पाकिस्तानी सेना भारतीय सेना की बराबरी करना या भारत को एक विरोधी के रूप में देखना बंद करे और अपने स्वयं के घरेलू मुद्दों, जैसे भूख और बेरोजगारी पर फोकस करना शुरु करे।
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न्यूज एजेंसी से बात करते हुए भारतीय रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर ने कहा कि अब 25 वर्षों के बाद, पाकिस्तान ने 1999 में भारत के साथ कारगिल युद्ध में अपनी सेना की भागीदारी को स्वीकार किया है। अगर पाकिस्तान स्वीकार करता है कि उसकी सेना ने उस समय इन घुसपैठों को अपनी योजना में शामिल किया था, तो यह दर्शाता है कि 75 वर्षों के बाद भी, उन्होंने अभी भी कश्मीर पर हार नहीं मानी है।
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विशेषज्ञ ने आगे कहा कि हालांकि कश्मीर भारत का हिस्सा है और दुनिया ने इसे स्वीकार किया है, लेकिन अब भी, पाकिस्तान द्वारा लड़े गए सभी युद्धों और हार के बाद भी, वे कश्मीर के बारे में बहस कर रहे हैं। अब समय आ गया है कि पाकिस्तानी सेना भारतीय सेना के साथ मुकाबला करने या भारत और उसकी सेना को दुश्मन के रूप में लेने की कोशिश करना बंद करे और अपने लोगों की देखभाल करे जो भूख से मर रहे हैं और जिनके पास कोई रोजगार नहीं है।
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रक्षा विशेषज्ञ अनिल गौर ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सेना में हथियारों और गोला-बारूद के लिए जो पैसा खर्च किया जा रहा है, उसे सार्वजनिक हित में लगाया जाना चाहिए। जाहिर तौर पर पाकिस्तान में किसी सेवारत शीर्ष सैन्य अधिकारी द्वारा पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकारोक्ति करते हुए, देश के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने 1999 में भारत के साथ कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना की भूमिका को स्वीकार किया है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने 6 सितंबर को रावलपिंडी में रक्षा दिवस के अवसर पर अपने संबोधन के दौरान यह टिप्पणी की। जियो न्यूज द्वारा पोस्ट किए गए उनके संबोधन के वीडियो के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने कहा, "पाकिस्तान एक साहसी और साहसी राष्ट्र है और स्वतंत्रता के महत्व और इसके लिए चुकाई जाने वाली कीमत को जानता है। चाहे वह 1948, 1965, 1971 (युद्ध), कारगिल युद्ध या सियाचिन संघर्ष हो, हजारों सैनिकों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
कारगिल युद्ध 60 दिनों से अधिक समय तक लड़ा गया और 26 जुलाई, 1999 को भारत की शानदार जीत के साथ समाप्त हुआ। भारतीय सशस्त्र बलों ने सर्दियों के महीनों के दौरान पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा विश्वासघाती रूप से कब्जा किए गए उच्च चौकियों की कमान को सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त किया। भारतीय सेना के बहादुर सैनिकों ने भारतीय वायु सेना की मदद से कारगिल युद्ध जीतने के लिए दुर्गम बाधाओं और शत्रुतापूर्ण इलाकों को पार किया, जिसने हवाई सहायता दी। ऑपरेशन विजय की सफलता के नाम पर कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुरों को श्रद्धांजलि दी जाती है।