10 विभागों में ‘बैंक डोर’ से 7,893 भर्तियां हुईं
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सरकारी नौकरियों में पहुंच की बदौलत नौकरियां पाना अब आसान नहीं होगा। पिछले दरवाजे से हुईं सरकारी नौकरियों में भर्ती के मामले में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार और जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने भविष्य में होने वाली भर्तियों के लिए विशेष दिशा निर्देश जारी किए हैं।
रियासत के रिटायर्ड असिस्टेंट इंजीनियर ने याचिका में दावा किया कि दस सरकारी विभागों में पहुंच और पैसे की बदौलत 7,893 लोगों ने नौकरियां हासिल कीं। खंडपीठ ने पाया कि सरकारी नौकरियों में पिछले दरवाजे से नियुक्तियों के दौरान सरकार के कदम से व्यक्ति के संवैधानिक अधिकारों को हनन हुआ है।
भारतीय संविधान की धारा 14 और 16 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के अनुसार ऐसे लोगों को नौकरियां दी गईं, जिनकी शैक्षणिक योग्यता भी नहीं थी। उन्होंने अपने दावों के साथ हलफनामे भी अदालत में पेश किए और अदालत से आग्रह किया कि अवैध नियुक्तियां रद्द की जाएं।
कोर्ट ने जारी किए दिशा निर्देश
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की कि 26 मार्च 2013 को जीएडी की ओर से जारी सर्कुलर को लागू करने के साथ उन अफसरोें और अथारिटी के खिलाफ कार्रवाई की जाए, जिन्होंने अवैध नियुक्तियां कीं। प्रतिवादी को निर्देश दिए जाएं कि भविष्य में ऐसी कोई अस्थाई नियुक्ति न करें।
साथ ही भर्ती को लेकर पारदर्शी व स्पष्ट योजना बनाएं। सरकार की ओर से पेश सीनियर एएजी गगन बसोत्रा ने सरकार के हाल के निर्देश को अदालत के समक्ष रखा, जिसमें तमाम उन नियुक्तियों या सेवा विस्तार को रद्द किया गया, जो नियमों को ताक पर रख की गई थीं
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने पाया कि अब सरकारी कार्यालयों में कैजुअल या सीजनल आधार पर नियुक्तियां संभव नहीं हैं। ऐसे किसी भी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया गया है। हालांकि इस आदेश से आपात परिस्थितियों में नियुक्तियों पर असर पड़ेगा।
इसलिए डेली वेजर, कैजुअल, सीजनल या एडहाक आधार पर नियुक्तियों के लिए सरकार की स्पष्ट भर्ती नीति होनी चाहिए। नागरिकों के सार्वजनिक रोजगार पाने के गारंटी मौलिक अधिकार और विधियों के समान संरक्षण की गारंटी है। सभी नियुक्तियों में गारंटी मौलिक अधिकार का अनुपालन सख्त होना चाहिए।