दविंदर मामले में एनआईए को मिले कई अहम सुराग, कई लोगों से हो सकती है पूछताछ
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आतंकियों के साथ पकड़े गए डीएसपी दविंदर सिंह मामले में जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) क्रॉस एलओसी ट्रेड के जरिए होने वाली टेरर फंडिंग के भी सूत्र तलाशेगी और अभी कुछ और लोगों को पूछताछ के लिए उठाएगी। जांच एजेंसी डीएसपी और नवीद से भी पूछताछ कर सकती है।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि कश्मीर घाटी से आतंकियों को बाहर निकालने की कोशिश में गिरफ्तार किए गए डीएसपी के साथ प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी सैयद नावेद मुश्ताक अहमद उर्फ नावेद बाबू को गिरफ्तार किया था। जिसने पूछताछ में बताया कि कैसे उसके संगठन को फंडिंग मिलती है और वह पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से किस तरह संपर्क में रहता है।
एनआईए ने 2016 में जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार व्यापार के संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और कश्मीर के बारामुला जिले के सलामाबाद और पुंछ जिले के चक्कां-दा-बाग में व्यापार सुविधा केंद्रों पर छापे मारे थे। इसके बावजूद पिछले चार वर्षों के दौरान जांच एजेंसी व्यापारियों से प्राप्त धन के अंतिम लाभार्थी को खोजने में असमर्थ रही। अधिकारियों ने कहा कि नावेद से पूछताछ के दौरान एजेंसी को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है।
अधिकारियों ने कहा कि अब इस मामले में पूछताछ के लिए कुछ और लोगों को उठाए जाने की संभावना है, क्योंकि डीएसपी के मामले में चल रही जांच से चार साल पुराना मामला फिर से चर्चा में आ गया है। हाल ही में पुलिस ने क्रॉस एलओसी व्यापार संगठन के अध्यक्ष तनवीर अहमद वानी को गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2008 में शुरू हुआ था क्रॉस एलओसी ट्रेड
भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के लिए वर्ष 2008 में क्रॉस एलओसी ट्रेड शुरू हुआ था। हालांकि केंद्र सरकार ने अप्रैल 2019 में इस व्यापार रास्ते के जरिए पाकिस्तान द्वारा अवैध हथियारों, नशीले पदार्थों और फर्जी करेंसी की आपूर्ति का हवाला देते हुए व्पापार रोक दिया था। अधिकारियों ने कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि डीएसपी दविंदर को इस फंडिंग पैटर्न की जानकारी नहीं है, क्योंकि वह लंबे समय से नावेद बाबू के साथ जुड़ा हुआ था।