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‘युद्ध पर जाने के लिए खुद जताई इच्छा’
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सांबा। शहीद अरूण खेत्रपाल की समाधी पर उन की भाबी श्रदांजली देते हुए
- फोटो : SAMBA
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सांबा। कस्बे के स्वर्ग धाम में स्थित अरुण खेत्रपाल मेमोरियल पार्क में सामाजिक संगठन सोशल क्लब के सदस्यों ने सोमवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें शहीद सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल को 48 वें शहीदी दिवस पर याद किया गया, उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
अरुण खेत्रपाल पाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 में हुआ था। उन्होंने 1967 में एनडीए ज्वाइन की, 13 जून 1971 में पहली पोस्टिंग 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट में हुई। इसी दौरान भारत-पाकिस्तान के मध्य युद्ध छिड़ गया और उन्होंने युद्ध में भाग लेने के लिए अधिकारियों से कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी आप नए ज्वाइन हुए हो। इस पर अरुण ने कहा कि मुझे युद्ध में भेजा जाए। जिस पर बटालियन ने यूनिट में ही उनकी ट्रेनिंग कराई और युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए अकेले ही करीब दर्जन टैंकों को नष्ट कर दिए। उसके बाद उनके टैंक पर दुश्मन का गोला गिरा और वह शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। उन्हें बैटल ऑफ बसंतर के युद्ध के हीरो के नाम से भी जाना जाता है।
कार्यक्रम के मुख्यातिथि उपायुक्त रोहित खजूरिया रहे। जबकि विशेष अतिथि शहीद अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल और उनकी भाभी इंदु खेत्रपाल रहीं। कार्यक्रम में एसीडी सिद्धार्थ धीमान, पूर्व विधायक डीके मनयाल, पूर्व विधायक यशपाल कुंडल, सेना के 176 आर्म्ड के अधिकारियों सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चे भी मौजूद रहे, जिन्होंने शहीद अरुण खेत्रपाल की विजयगाथा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में नगरपालिका के चेयरमैन पवन कोहली, उपप्रधान कुमेर सिंह, पार्षद विनोद सिंह, सेवानिवृत्त कर्नल अमरीक सिंह, कैप्टन इंदर सिंह, लायंस क्लब के प्रधान पवन वर्मा, कर्नल सोमदत्त, रंजु गुप्ता, अजय सिंह, राजेंद्र शर्मा सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
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बहुत मेहनती थे शहीद अरुण
सांबा। बसंतर युद्ध के हीरो शहीद अरुण खेत्रपाल के सहपाठी दलजीत सिंह श्रद्धांजलि देने दिल्ली से आए। अमर उजाला को उन्होंने बताया कि अरुण के साथ कक्षा में सहपाठी रहे। वह एक ही हाउस में थे। एक बार 18 इवेंट में से उन्होंने 14 पदक जीते थे। जिसमें अरुण का काफी योगदान रहा। गाने का भी उन्हें काफी शौक रहा। उन्हें सेना में जाने का शौक था और वह सेना में अधिकारी के लिए चुने गए। ब्यूरो
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अरुण खेत्रपाल पाल का जन्म 14 अक्टूबर 1950 में हुआ था। उन्होंने 1967 में एनडीए ज्वाइन की, 13 जून 1971 में पहली पोस्टिंग 17 पूना हॉर्स रेजीमेंट में हुई। इसी दौरान भारत-पाकिस्तान के मध्य युद्ध छिड़ गया और उन्होंने युद्ध में भाग लेने के लिए अधिकारियों से कहा, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी आप नए ज्वाइन हुए हो। इस पर अरुण ने कहा कि मुझे युद्ध में भेजा जाए। जिस पर बटालियन ने यूनिट में ही उनकी ट्रेनिंग कराई और युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए अकेले ही करीब दर्जन टैंकों को नष्ट कर दिए। उसके बाद उनके टैंक पर दुश्मन का गोला गिरा और वह शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया। उन्हें बैटल ऑफ बसंतर के युद्ध के हीरो के नाम से भी जाना जाता है।
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कार्यक्रम के मुख्यातिथि उपायुक्त रोहित खजूरिया रहे। जबकि विशेष अतिथि शहीद अरुण खेत्रपाल के छोटे भाई मुकेश खेत्रपाल और उनकी भाभी इंदु खेत्रपाल रहीं। कार्यक्रम में एसीडी सिद्धार्थ धीमान, पूर्व विधायक डीके मनयाल, पूर्व विधायक यशपाल कुंडल, सेना के 176 आर्म्ड के अधिकारियों सहित विभिन्न स्कूलों के बच्चे भी मौजूद रहे, जिन्होंने शहीद अरुण खेत्रपाल की विजयगाथा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में नगरपालिका के चेयरमैन पवन कोहली, उपप्रधान कुमेर सिंह, पार्षद विनोद सिंह, सेवानिवृत्त कर्नल अमरीक सिंह, कैप्टन इंदर सिंह, लायंस क्लब के प्रधान पवन वर्मा, कर्नल सोमदत्त, रंजु गुप्ता, अजय सिंह, राजेंद्र शर्मा सहित कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
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बहुत मेहनती थे शहीद अरुण
सांबा। बसंतर युद्ध के हीरो शहीद अरुण खेत्रपाल के सहपाठी दलजीत सिंह श्रद्धांजलि देने दिल्ली से आए। अमर उजाला को उन्होंने बताया कि अरुण के साथ कक्षा में सहपाठी रहे। वह एक ही हाउस में थे। एक बार 18 इवेंट में से उन्होंने 14 पदक जीते थे। जिसमें अरुण का काफी योगदान रहा। गाने का भी उन्हें काफी शौक रहा। उन्हें सेना में जाने का शौक था और वह सेना में अधिकारी के लिए चुने गए। ब्यूरो