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अमृतसर के फूलों से सजा चीची माता मंदिर
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सांबा माता के दरवार को सजाते कारीगर
- फोटो : SAMBA
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सांबा। दो वर्ष बाद नवरात्र पर चीची माता के दरबार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना के बीच माता के दरबार को सजा दिया गया है। मंदिर के बाहर की सजावट अमृतसर से लाए गए कृत्रिम फूलों से की गई है, जबकि दरबार के भीतर माता का दरबार गेंदे के फूलों से सजाया गया है। इस बार श्रद्धालुओं ज्यादा संख्या को देखते हुए बच्चों के खिलौनों समेत अन्य सामान के लिए मंदिर परिसर में अलग से बाजार सजाया गया है। वहीं प्रसाद के अलग काउंटर और खाद्य पदार्थों के स्टॉल भी ज्यादा संख्या में लगाए जा रहे हैं। रविवार को नवरात्र की पूर्वसंध्या तक नवरात्र उत्सव को भव्य बनाने के लिए मंदिर समिति के सदस्य और वर्कर जुटे रहे।
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मंदिर का इतिहास
चीची माता कुल देवी है, किवदंति के अनुसार नानके चक क्षेत्र में एक परिवार रहता था। उनके घर एक लड़की ने जन्म लिया। वह छोटी ही थी तो मां का देहांत हो गया। पिता नंदनी पहाड़ी क्षेत्र में पशु चराने आते थे। एक दिन बच्ची भी पिता के पीछे-पीछे नंदनी पहुंच गई। जहां एक तालाब था पर बच्चे बैठे थे। जो कुछ महाजन बिरादरी व कुछ ब्राह्मण थे। उनसे बच्ची ने पूछा कि उसके पिता को किसी ने देखा है। बच्चों ने मजाक किया कि वह तालाब में डूब गए हैं। बच्ची ने भी तालाब में छलांग लगा दी। उसकी एक चीची उंगली बाहर रही, जब पिता आए तो उसने देखा कि किसी बच्चे की उंगली दिखाई दे रही है। उसने तालाब से उसे निकाला देखा कि यह तो उसकी बच्ची है। तब उक्त बच्चों ने सारी कहानी बता दी। उस समय बच्ची के पिता ने उन्हें श्राप दिया व उन्होंने अपनी बच्ची के साथ आत्मदाह कर लिया। अब महाजन व ब्राह्मण बिरादरी कुल देवी के रूप में मान रहे हैं।
एक अन्य किवदंती के अनुसार माता पार्वती के पिता महाराज दक्ष ने यज्ञ किया। सभी देवी देवताओं को निमंत्रण दिया। भगवान शिव को नहीं बुलाया, जिस पर मां पार्वती मायके पहुंचीं। उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किए जाने से मां पार्वती ने यज्ञ के कुंड में छलांग लगा दी। भगवान शिव ने देखा तो वह भी गुस्से में पहुंच गए। उन्होंने कुंड को ही उठा लिया। सभी देवी देवता भगवान विष्णु के पास गए, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां पार्वती के अंग काटे। जहां-जहां जो अंग गिरा वहां शक्ति पीठ बने। बताया गया है कि इस स्थान पर मां पार्वती की चीची उंगली गिरी थी, जिसे चीची माता का अवतार माना जाता है। आज देश भर के श्रद्धालु चीची माता मंदिर में माथा टेक कर निकलते हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए लंगर आदि की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाद का प्रबंध परिसर में ही किया गया है। खानपान के लिए मंदिर परिसर में ही दुकानें सजाई गई हैं।
- सुभाष गुप्ता, सदस्य, मंदिर प्रबंधक कमेटी
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नवरात्र को लेकर सभी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ के अनुमान के चलते पुजारियों की भी ड्यूटियां लगाई गई हैं।
- बंसी लाल, मंदिर के मुख्य पुजारी
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आरती का समय
सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। 4.30 बजे आरती का आयोजन किया जाएगा।
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मंदिर का इतिहास
चीची माता कुल देवी है, किवदंति के अनुसार नानके चक क्षेत्र में एक परिवार रहता था। उनके घर एक लड़की ने जन्म लिया। वह छोटी ही थी तो मां का देहांत हो गया। पिता नंदनी पहाड़ी क्षेत्र में पशु चराने आते थे। एक दिन बच्ची भी पिता के पीछे-पीछे नंदनी पहुंच गई। जहां एक तालाब था पर बच्चे बैठे थे। जो कुछ महाजन बिरादरी व कुछ ब्राह्मण थे। उनसे बच्ची ने पूछा कि उसके पिता को किसी ने देखा है। बच्चों ने मजाक किया कि वह तालाब में डूब गए हैं। बच्ची ने भी तालाब में छलांग लगा दी। उसकी एक चीची उंगली बाहर रही, जब पिता आए तो उसने देखा कि किसी बच्चे की उंगली दिखाई दे रही है। उसने तालाब से उसे निकाला देखा कि यह तो उसकी बच्ची है। तब उक्त बच्चों ने सारी कहानी बता दी। उस समय बच्ची के पिता ने उन्हें श्राप दिया व उन्होंने अपनी बच्ची के साथ आत्मदाह कर लिया। अब महाजन व ब्राह्मण बिरादरी कुल देवी के रूप में मान रहे हैं।
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एक अन्य किवदंती के अनुसार माता पार्वती के पिता महाराज दक्ष ने यज्ञ किया। सभी देवी देवताओं को निमंत्रण दिया। भगवान शिव को नहीं बुलाया, जिस पर मां पार्वती मायके पहुंचीं। उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किए जाने से मां पार्वती ने यज्ञ के कुंड में छलांग लगा दी। भगवान शिव ने देखा तो वह भी गुस्से में पहुंच गए। उन्होंने कुंड को ही उठा लिया। सभी देवी देवता भगवान विष्णु के पास गए, भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से मां पार्वती के अंग काटे। जहां-जहां जो अंग गिरा वहां शक्ति पीठ बने। बताया गया है कि इस स्थान पर मां पार्वती की चीची उंगली गिरी थी, जिसे चीची माता का अवतार माना जाता है। आज देश भर के श्रद्धालु चीची माता मंदिर में माथा टेक कर निकलते हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए लंगर आदि की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रसाद का प्रबंध परिसर में ही किया गया है। खानपान के लिए मंदिर परिसर में ही दुकानें सजाई गई हैं।
- सुभाष गुप्ता, सदस्य, मंदिर प्रबंधक कमेटी
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नवरात्र को लेकर सभी तैयारियां मुकम्मल हो चुकी हैं। श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ के अनुमान के चलते पुजारियों की भी ड्यूटियां लगाई गई हैं।
- बंसी लाल, मंदिर के मुख्य पुजारी
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आरती का समय
सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। 4.30 बजे आरती का आयोजन किया जाएगा।