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सुरूईंसर-मानसर प्राधिकरण ने मनवाल मंदिरों में हेरिटेज वॉक का आयोजन किया
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कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते कलाकार।
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सांबा। आजादी का अमृत महोत्सव के संदर्भ में सुरूईंसर-मानसर विकास प्राधिकरण ने श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के सहयोग से शुक्रवार को डोगरा क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों में हेरिटेज वॉक का आयोजन किया। मनवाल के ऐतिहासिक बाबोर मंदिरों में हेरिटेज वॉक में इतिहासकारों, शिक्षाविदों, कलाकारों और छात्रों की एक उत्साही सभा का आयोजन किया गया।
हेरिटेज वॉक को गुरविंदर जीत सिंह, सीईओ एसएमडीए और प्रो अशोक शर्मा, डीन, एफओएस, एसएमवीडीयू ने झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें एक किलोमीटर में फैले पांच मंदिर स्थलों को कवर किया गया। रैली के दौरान हेरिटेज बैठक और हेरिटेज लेक्चर के बाद प्रतिभागियों को मनवाल में मंदिरों के प्रमुख ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक पहलुओं के बारे में जागरूक किया गया जिनका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जा रहा है।यह मंदिर उत्तर भारत में नागर मंदिर निर्माण आंदोलन की पराकाष्ठा को दर्शाते हैं। जय करण सिंह और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जम्मू-कश्मीर सर्कल के अन्य विशेषज्ञों ने सभी को मंदिरों के ऐतिहासिक सार और स्थापत्य भव्यता के बारे में जानकारी दी। अर्थात देवी भगवती मंदिर, डेरा बाबोर, काला डेरा एक और दो, और डेरा मंदिर शामिल है।
सुरूईंसर-मानसर विकास प्राधिकरण के सीईओ ने जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। एसएमवीडीयू के रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह जमवाल ने इस तरह के और अधिक आयोजन करने और छात्रों को जम्मू क्षेत्र की संस्कृति और विरासत के बारे में अधिक जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड लैंडस्केप डिजाइन और स्कूल ऑफ फिलॉसफी एंड कल्चर के छात्र, जो देश के विभिन्न हिस्सों से आए इस कार्यक्रम के मुख्य प्रतिभागी थे ने अलंकृत नक्काशी और मंदिर निर्माण की शैली में गहरी रुचि दिखाई।
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उन्होंने तस्वीरों, वीडियो, रेखाचित्रों के माध्यम से मंदिरों बारे कहा कि यह मंदिर यूनेस्को के विरासत स्थलों में शामिल होने के योग्य हैं। इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों में आर आदित्य कुमार सिंह, एचओडी आर्किटेक्चर, वीके डोगरा, एचओडी सिविल इंजीनियरिंग शामिल थे।
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हेरिटेज वॉक को गुरविंदर जीत सिंह, सीईओ एसएमडीए और प्रो अशोक शर्मा, डीन, एफओएस, एसएमवीडीयू ने झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें एक किलोमीटर में फैले पांच मंदिर स्थलों को कवर किया गया। रैली के दौरान हेरिटेज बैठक और हेरिटेज लेक्चर के बाद प्रतिभागियों को मनवाल में मंदिरों के प्रमुख ऐतिहासिक, स्थापत्य और सांस्कृतिक पहलुओं के बारे में जागरूक किया गया जिनका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किया जा रहा है।यह मंदिर उत्तर भारत में नागर मंदिर निर्माण आंदोलन की पराकाष्ठा को दर्शाते हैं। जय करण सिंह और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जम्मू-कश्मीर सर्कल के अन्य विशेषज्ञों ने सभी को मंदिरों के ऐतिहासिक सार और स्थापत्य भव्यता के बारे में जानकारी दी। अर्थात देवी भगवती मंदिर, डेरा बाबोर, काला डेरा एक और दो, और डेरा मंदिर शामिल है।
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सुरूईंसर-मानसर विकास प्राधिकरण के सीईओ ने जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। एसएमवीडीयू के रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह जमवाल ने इस तरह के और अधिक आयोजन करने और छात्रों को जम्मू क्षेत्र की संस्कृति और विरासत के बारे में अधिक जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया। स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड लैंडस्केप डिजाइन और स्कूल ऑफ फिलॉसफी एंड कल्चर के छात्र, जो देश के विभिन्न हिस्सों से आए इस कार्यक्रम के मुख्य प्रतिभागी थे ने अलंकृत नक्काशी और मंदिर निर्माण की शैली में गहरी रुचि दिखाई।
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उन्होंने तस्वीरों, वीडियो, रेखाचित्रों के माध्यम से मंदिरों बारे कहा कि यह मंदिर यूनेस्को के विरासत स्थलों में शामिल होने के योग्य हैं। इस अवसर पर उपस्थित अन्य लोगों में आर आदित्य कुमार सिंह, एचओडी आर्किटेक्चर, वीके डोगरा, एचओडी सिविल इंजीनियरिंग शामिल थे।