{"_id":"635ae4dedf2d0863ce2df3da","slug":"cultural-rspura-news-jmu271035322","type":"story","status":"publish","title_hn":"धर्म के रास्ते पर चल कर करें सबका भला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धर्म के रास्ते पर चल कर करें सबका भला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरएस पुरा। मानव को धर्म के रास्ते पर चल सबका भला करना चाहिए। जब किसी पर कोई भी मुसीबत आती है तो कहा जाता है कि वह कर्मों का फल है। प्राणी सब जानते हुए भी अच्छे कर्म करने से दूर रहता है। यह ज्ञान अमृतसर से आए स्वामी आत्मा प्रकाश महाराज ने दिए।
वीरवार को सद्गुरु महाराज रामेश्वरानंद महाराज की 32वीं पुण्यतिथि पर कोटली गल्ला बाना गांव स्थित रामेश्वर धाम में चार दिवसीय संत सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें देशभर के कई संत शामिल हुए। उन्होंने प्रभु की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। पहले दिन काफी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। स्वामी आत्मा प्रकाश महाराज ने बताया कि संतों के पास बैठने से उनकी संगत करने से ज्ञान प्राप्त होता है। माया ग्रस्त लोगों को प्रभु के सच्चे नाम का बोध करवा कर परमानंद की प्राप्ति करवाना होता है।
हरिद्वार से आए संत स्वामी अमरानंद ने कहा कि हमें अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकाल भगवान की शरण में जाना चाहिए। जिस तरह विशाल वृक्ष एक छोटे से बीज के अंदर छिपा होता है, ठीक उसी तरह परमात्मा भी हमारे अंदर विद्यमान है। इस दौरान स्वामी विवेकानंद, स्वामी स्वरूप नंद और योगेश्वर नंद आदि संतों ने भी प्रवचन दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
वीरवार को सद्गुरु महाराज रामेश्वरानंद महाराज की 32वीं पुण्यतिथि पर कोटली गल्ला बाना गांव स्थित रामेश्वर धाम में चार दिवसीय संत सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें देशभर के कई संत शामिल हुए। उन्होंने प्रभु की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। पहले दिन काफी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया। स्वामी आत्मा प्रकाश महाराज ने बताया कि संतों के पास बैठने से उनकी संगत करने से ज्ञान प्राप्त होता है। माया ग्रस्त लोगों को प्रभु के सच्चे नाम का बोध करवा कर परमानंद की प्राप्ति करवाना होता है।
विज्ञापन
हरिद्वार से आए संत स्वामी अमरानंद ने कहा कि हमें अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकाल भगवान की शरण में जाना चाहिए। जिस तरह विशाल वृक्ष एक छोटे से बीज के अंदर छिपा होता है, ठीक उसी तरह परमात्मा भी हमारे अंदर विद्यमान है। इस दौरान स्वामी विवेकानंद, स्वामी स्वरूप नंद और योगेश्वर नंद आदि संतों ने भी प्रवचन दिए।
विज्ञापन