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गांव दवलैड में श्रीमद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ किया
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गांव दवलैड में भागवत कथा के दौरान प्रवचन का रसपान करते भक्तजन
- फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। गांव दबलैड में शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा शुभारंभ से पूर्व गंगा सरोवर मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। ढोल नगाड़े के साथ निकाली गई कलश यात्रा में शामिल भक्तों की ओर से लगाए जा रहे जयघोष और भजन कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया।
कलश यात्रा गांव से होते हुए प्राचीन बावली पर पहुंची। जहां पूजा अर्चना के साथ कलश को बावली के पवित्र जल से भरा गया और वापस आश्रम आकर यात्रा संपन्न हुई। जहां विधि विधान से पूजन के बाद कलश की स्थापना की गई। इस मौके पर परम पूज्य सुभाष शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि कथा श्रवण से मानव जीवन में एक जन्म नहीं अपितु कई जन्म के पापों का नाश होने के साथ ही शुभ कर्मों का उदय होता है। इसके श्रवण मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होकर शांत व स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान हरिद्वार में किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत मुनि से योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। व्यास का वर्णन करते कहा कि भगवत श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। भगवान विष्णु कहते हैं की जो मेरी कथा कहता और कराता है उसके इस लोक के सभी कष्टों का वह हरण करते हैं और अंत में उसे बैकुंठ में वास मिलता है।
अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा संपन्न हुई। गांव के कैलाशपति शर्मा, ओम प्रकाश बाबा शाम गीरी, जंग बहादुर मनहास ने कहा कि कथा कराने का मकसद सभी वर्ग के लोगों को धर्म के मार्ग पर लाए जाने के साथ देश व दुनिया में फैली कोरोना महामारी को दूर करना है। ताकि सभी प्राणियों का भला हो सके।
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कलश यात्रा गांव से होते हुए प्राचीन बावली पर पहुंची। जहां पूजा अर्चना के साथ कलश को बावली के पवित्र जल से भरा गया और वापस आश्रम आकर यात्रा संपन्न हुई। जहां विधि विधान से पूजन के बाद कलश की स्थापना की गई। इस मौके पर परम पूज्य सुभाष शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि कथा श्रवण से मानव जीवन में एक जन्म नहीं अपितु कई जन्म के पापों का नाश होने के साथ ही शुभ कर्मों का उदय होता है। इसके श्रवण मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त होकर शांत व स्थिर हो जाता है। उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद्भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान हरिद्वार में किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत मुनि से योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। व्यास का वर्णन करते कहा कि भगवत श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। भगवान विष्णु कहते हैं की जो मेरी कथा कहता और कराता है उसके इस लोक के सभी कष्टों का वह हरण करते हैं और अंत में उसे बैकुंठ में वास मिलता है।
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अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा संपन्न हुई। गांव के कैलाशपति शर्मा, ओम प्रकाश बाबा शाम गीरी, जंग बहादुर मनहास ने कहा कि कथा कराने का मकसद सभी वर्ग के लोगों को धर्म के मार्ग पर लाए जाने के साथ देश व दुनिया में फैली कोरोना महामारी को दूर करना है। ताकि सभी प्राणियों का भला हो सके।
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