{"_id":"60c4fab88ebc3e817c26a4e2","slug":"cultural-rspura-news-jmu2371934178","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाल श्रमिकों की दर में कमी आई पर इसमें और सुधार करने की जरूरत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाल श्रमिकों की दर में कमी आई पर इसमें और सुधार करने की जरूरत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरएस पुरा। कुछ वर्षों से बाल श्रमिकों की दर में कमी आई है। अभी इसमें काफी सुधार की जरूरत है। सरकार की ओर से इस तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। आज भी कई बच्चों को कठिन कार्यों में लगाया जा रहा है। जैसे मजदूरी, चाय व होटल आदि दुकानों पर वे काम करते दिखाई देते हैं।
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना प्रतिबंधित है। लेकिन ईंट भट्टों पर काम करना, गलीचा बुनना, कपड़े तैयार करना, घरेलू कामकाज, खानपान सेवाएं (जैसे चाय की दुकान पर) खेतीबाड़ी, मछली पालन और खानों में बच्चे काम करते हुए देखा जा सकते हैं। इसके अलावा बच्चों को और भी कई तरह के शोषण का शिकार होने का खतरा बना रहता है। ईट भट्टों पर आज भी बच्चे पीडी दर बाल मजदूरी कर रहे हैं, जिसके लिए संबंधित परिवार इसके जिम्मेदार है। परिवार का खर्च चलाने के लिए इन बच्चों को मजबूरी में मजदूरी करने पर सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करने पर इस पर रोक नहीं लग रही।
समाजसेवी कामरेड स्वरूप सिंह का कहना है कि आज भी पहले जैसे हालत हैं। सरकार की ओर से बाल मजदूरी करने पर प्रतिबंध लगाए होने पर कानून होने पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बाजारों में भी कई स्थानों पर बच्चे काम करते देखे जा सकते हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि कई बच्चे घर की आर्थिक हालत बेहतर नहीं होने पर काम करते हैं। सरकार को ऐसे परिवारों की ओर ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन
सेवानिवृत्त हेड मास्टर प्रमोद कुमार का कहना है कि बाल मजदूरी और शोषण के अनेक कारण हैं। इनमें गरीबी, सामाजिक मापदंड, व्यस्कों तथा किशोरों के लिए अच्छे कार्य करने के अवसरों की कमी है। ये सब वजह सिर्फ कारण नहीं बल्कि भेदभाव से पैदा होने वाली सामाजिक असमानताओं के परिणाम हैं। कई घरों में 18 वर्ष से कम आयु के लड़के व लड़कियां काम कर रही हैं, लेकिन सरकार के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। बाल मजदूरी की प्रथा को दूर करने के लिए सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए।
-----
बाल मजदूरी कराना कानूनी तौर पर गलत है। अगर कोई शिकायत करे तो कार्रवाई की जाती है।
-रामलाल शर्मा, एसडीएम, आरएस पुरा
विज्ञापन
18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम कराना प्रतिबंधित है। लेकिन ईंट भट्टों पर काम करना, गलीचा बुनना, कपड़े तैयार करना, घरेलू कामकाज, खानपान सेवाएं (जैसे चाय की दुकान पर) खेतीबाड़ी, मछली पालन और खानों में बच्चे काम करते हुए देखा जा सकते हैं। इसके अलावा बच्चों को और भी कई तरह के शोषण का शिकार होने का खतरा बना रहता है। ईट भट्टों पर आज भी बच्चे पीडी दर बाल मजदूरी कर रहे हैं, जिसके लिए संबंधित परिवार इसके जिम्मेदार है। परिवार का खर्च चलाने के लिए इन बच्चों को मजबूरी में मजदूरी करने पर सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं करने पर इस पर रोक नहीं लग रही।
विज्ञापन
समाजसेवी कामरेड स्वरूप सिंह का कहना है कि आज भी पहले जैसे हालत हैं। सरकार की ओर से बाल मजदूरी करने पर प्रतिबंध लगाए होने पर कानून होने पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बाजारों में भी कई स्थानों पर बच्चे काम करते देखे जा सकते हैं। इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि कई बच्चे घर की आर्थिक हालत बेहतर नहीं होने पर काम करते हैं। सरकार को ऐसे परिवारों की ओर ध्यान देना चाहिए।
विज्ञापन
सेवानिवृत्त हेड मास्टर प्रमोद कुमार का कहना है कि बाल मजदूरी और शोषण के अनेक कारण हैं। इनमें गरीबी, सामाजिक मापदंड, व्यस्कों तथा किशोरों के लिए अच्छे कार्य करने के अवसरों की कमी है। ये सब वजह सिर्फ कारण नहीं बल्कि भेदभाव से पैदा होने वाली सामाजिक असमानताओं के परिणाम हैं। कई घरों में 18 वर्ष से कम आयु के लड़के व लड़कियां काम कर रही हैं, लेकिन सरकार के पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है। बाल मजदूरी की प्रथा को दूर करने के लिए सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए।
-----
बाल मजदूरी कराना कानूनी तौर पर गलत है। अगर कोई शिकायत करे तो कार्रवाई की जाती है।
-रामलाल शर्मा, एसडीएम, आरएस पुरा