{"_id":"696d4ce8b0d11088280717f8","slug":"cultural-news-jammu-news-c-10-jmu1052-814688-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: लोक और शास्त्रीय नृत्य से दिखी देश की विविध संस्कृति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: लोक और शास्त्रीय नृत्य से दिखी देश की विविध संस्कृति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- आईआईएम में नटरंग के सहयोग से 150 कलाकारों ने पेश किया मेगा डांस शो
जम्मू। आईआईएम में रविवार को छात्र-छात्राओं की ओर से नृत्य प्रस्तुति कलर्स ऑफ इंडिया आयोजित की गई। मेगा डांस शो से देश की जीवंत कला और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर पेश किया गया। नटरंग के सहयोग से हुए कार्यक्रम में लगभग 150 छात्र कलाकारों ने हिस्सा लिया।
निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय और पद्मश्री रंगकर्मी बलवंत ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे। डांस शो में विभिन्न राज्यों की नृत्य परंपराओं की झलक दिखी। राजस्थान का कालबेलिया और घूमर, गुजरात का डांडिया और गरबा, पंजाब का भांगड़ा, पारंपरिक ढूमाल, कठपुतली और कोली नृत्य जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराया।
प्रोफेसर सहाय ने कहा कि नेतृत्व की शिक्षा केवल विश्लेषण और पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संस्कृति, रचनात्मकता और भावनात्मक समझ भी शामिल हो। पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने आईआईएम की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने प्रदर्शन कला को केवल मंचीय गतिविधि न मानकर गंभीर शैक्षणिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है। उन्होंने छात्र छात्राओं की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया अंतिम परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण होती है। पद्मश्री बलवंत ठाकुर और प्रोफेसर सहाय ने अंतरराष्ट्रीय चित्रकार संगोष्ठी की चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। आईआईएम में रविवार को छात्र-छात्राओं की ओर से नृत्य प्रस्तुति कलर्स ऑफ इंडिया आयोजित की गई। मेगा डांस शो से देश की जीवंत कला और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच पर पेश किया गया। नटरंग के सहयोग से हुए कार्यक्रम में लगभग 150 छात्र कलाकारों ने हिस्सा लिया।
निदेशक प्रोफेसर बीएस सहाय और पद्मश्री रंगकर्मी बलवंत ठाकुर विशेष रूप से उपस्थित रहे। डांस शो में विभिन्न राज्यों की नृत्य परंपराओं की झलक दिखी। राजस्थान का कालबेलिया और घूमर, गुजरात का डांडिया और गरबा, पंजाब का भांगड़ा, पारंपरिक ढूमाल, कठपुतली और कोली नृत्य जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराया।
विज्ञापन
प्रोफेसर सहाय ने कहा कि नेतृत्व की शिक्षा केवल विश्लेषण और पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संस्कृति, रचनात्मकता और भावनात्मक समझ भी शामिल हो। पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने आईआईएम की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान ने प्रदर्शन कला को केवल मंचीय गतिविधि न मानकर गंभीर शैक्षणिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाया है। उन्होंने छात्र छात्राओं की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीखने की प्रक्रिया अंतिम परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण होती है। पद्मश्री बलवंत ठाकुर और प्रोफेसर सहाय ने अंतरराष्ट्रीय चित्रकार संगोष्ठी की चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।
विज्ञापन