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महिलाओं ने चूल्हे पर खाना पकाना किया शुरू
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मिट्टी के तंदूर पर खाना पकाती महिलाएं
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ज्यौड़ियां। रसाई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों के आगे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों ने घुटने टेक दिए हैं। लोगों ने खाना पकाने के लिए एक बार फिर बंद पड़े चूल्हे जलाने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने उन पर खाना पकाना शुरू कर दिया है।
रसोई गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत पर क्षेत्र महिलाओं शकुंतला देवी, दर्शना देवी, सुमन चौधरी तथा रेखा देवी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 10-15 साल पहले चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता था, लेकिन उसके बाद गैस सिलेंडर आ गए। ज्यादातर लोगों ने चूल्हों पर खाना पकाना बंद कर दिया और खाना पकाने के लिए गैस सिलिंडर का ही इस्तेमाल करने लगे, लकड़ी के चूल्हे पर वह लोग ही खाना पकाते थे जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। वर्ष 2014 में जब भाजपा सरकार आई तो उज्जवला योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे गरीबों को मुफ्त में गैस सिलिंडर कनेक्शन दिए, जिसके बाद सभी लोगों ने चूल्हों का इस्तेमाल बंद कर दिया और गैस पर खाना पकने लगा, लेकिन सरकार ने धीरे-धीरे घरेलू गैस सिलिंडरों के दाम बढ़ाना शुरू कर दिया। अब गैस सिलिंडर का दाम हजार रुपये के करीब पहुंच गया है। इतना महंगा सिलिंडर हम खरीद नहीं सकते हैं।
इस विषय में विजय कुमार, कुलदीप सिंह तथा घसीटा सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में न ही कोई काम-धंधा है। जहां पर हम लोग दिहाडी लगाकर गैस खरीद सकें। मनरेगा जैसी स्कीमों से हमें काम मिलता था। अब पता नहीं वह कहां चली गई। पांच छह साल हमें कोई दिहाडी भी नहीं मिल रही है।
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महंगाई पर लगाई जाए रोक
विजयपुर। कांग्रेस सेवादल के सांबा जिला प्रधान धर्मपाल ने मंगलवार को एक बैठक में कहा कि महंगाई चरम पर है। केंद्र सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस कारण लोग काफी परेशान हैं। धर्मपाल ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, गैस सिलिंडर, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इस कारण गरीब परिवार को दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर तरह का लोगों पर टैक्स लगाए जा रही है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि महंगाई को कम किया जाए ताकि गरीब दो वक्त की रोटी खा सके। संवाद
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रसोई गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत पर क्षेत्र महिलाओं शकुंतला देवी, दर्शना देवी, सुमन चौधरी तथा रेखा देवी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 10-15 साल पहले चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता था, लेकिन उसके बाद गैस सिलेंडर आ गए। ज्यादातर लोगों ने चूल्हों पर खाना पकाना बंद कर दिया और खाना पकाने के लिए गैस सिलिंडर का ही इस्तेमाल करने लगे, लकड़ी के चूल्हे पर वह लोग ही खाना पकाते थे जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे थे। वर्ष 2014 में जब भाजपा सरकार आई तो उज्जवला योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे गरीबों को मुफ्त में गैस सिलिंडर कनेक्शन दिए, जिसके बाद सभी लोगों ने चूल्हों का इस्तेमाल बंद कर दिया और गैस पर खाना पकने लगा, लेकिन सरकार ने धीरे-धीरे घरेलू गैस सिलिंडरों के दाम बढ़ाना शुरू कर दिया। अब गैस सिलिंडर का दाम हजार रुपये के करीब पहुंच गया है। इतना महंगा सिलिंडर हम खरीद नहीं सकते हैं।
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इस विषय में विजय कुमार, कुलदीप सिंह तथा घसीटा सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में न ही कोई काम-धंधा है। जहां पर हम लोग दिहाडी लगाकर गैस खरीद सकें। मनरेगा जैसी स्कीमों से हमें काम मिलता था। अब पता नहीं वह कहां चली गई। पांच छह साल हमें कोई दिहाडी भी नहीं मिल रही है।
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महंगाई पर लगाई जाए रोक
विजयपुर। कांग्रेस सेवादल के सांबा जिला प्रधान धर्मपाल ने मंगलवार को एक बैठक में कहा कि महंगाई चरम पर है। केंद्र सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है। इस कारण लोग काफी परेशान हैं। धर्मपाल ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, गैस सिलिंडर, खाने-पीने की वस्तुओं के दाम भी आसमान छू रहे हैं। इस कारण गरीब परिवार को दो वक्त की रोटी के लाले पड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर तरह का लोगों पर टैक्स लगाए जा रही है, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि महंगाई को कम किया जाए ताकि गरीब दो वक्त की रोटी खा सके। संवाद