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लोगों को भा रही हाथों की कारीगरी
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जम्मू। नाबार्ड की ओर से कला केंद्र में आयोजित अखिल भारतीय कला शिल्प मेला में दूसरे दिन भी चहल पहल रही। दूसरे राज्यों से मेले में अपने उत्पाद लेकर आए कारीगरों का कहना है कि यहां उनके उत्पाद को पसंद किया जा रहा है। मेला दो अक्टूबर तक जारी रहेगा।
मधुबनी बिहार से युवा आकृति संगम के मधुबनी पेंटिंग स्टॉल पर उपलब्ध दुपट्टा, शॉल, पेपर पेंटिंग, हैंड बैग, पर्स, साड़ियां युवतियों और महिलाओं को खूब भा रहे। पेपर के ऊपर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग है, जबकि कपड़ों पर पोस्टर कलर का प्रयोग है।
हिमाचल प्रदेश के किनौर से आए रामकिशन कहते हैं कि वह पारंपरिक वस्त्रों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। स्टॉल पर उपलब्ध कोट, टोपी आदि कपड़े भेंड़ के ऊन से बने हैं, जो पसंद किए जा रह हैं।
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से आए मुजीब की म्यूजिक आर्ट्स लैंप भी आकर्षक हैं। मुजीब बताते हैं कि इस लैंप की रोशनी से कीड़े या मच्छर नहीं आते। इनपर म्यूजिक आर्ट बना है। उत्तरप्रदेश के बागपत से आए दिलशाद का हैंडलूम प्रोडक्ट है। इसमें डबल बेड कवर, बेडशीट, कुशन कवर शामिल हैं। इनकी खासियत है कि ये गर्मी में ठंडा और सर्दी में गरम रहते हैं। मुजीब के अनुसार मेले में लोगों को वाजिब कीमत पर उत्पाद मिल रहे हैं।
पंजाब के स्टॉल पर बांस के अचार और मुरब्बे
कला शिल्प मेले में पंजाब की रेणु शर्मा की अचार की स्टॉल है, जहां 65 प्रकार के अचार हैं। इसके अलावा मुरब्बा, आंवला कैंडी, एलोवेरा जूस भी हैं। बांस के अचार और मुरब्बे भी है। स्टॉल पर यह 60 से 400 रुपये तक में उपलब्ध हैं। झारखंड के जामताड़ा की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी स्टॉल लगाया है, जहां वुलेन जैकेट, कॉटन के कुर्ते, पजामे, शर्ट सभी साइज में उपलब्ध हैं।
हाथों की कारीगरी लोगों को कर रही आकर्षित
पंचकुला की परमजीत के स्टॉल पर दरी, मैट, डोर मैट आदि हैं। इन पर हाथों की कारीगरी देखते बनती है। पलवल के स्टॉल पर जयपुरिया रजाई, हैंडमेड बेड शीट आदि हैं। बिहार के समस्तीपुर से आई मधु देवी का मधुबनी-मिथिला आर्ट का स्टॉल है। यहां न्यूनतम सौ रुपये से अधिकतम 500 रुपये तक की पेपर, कैनवास पर बनी पेंटिंग उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त सिल्क की साड़ी, दुपट्टा, स्टॉल, सूट, तकिये का कवर, बेड शीट भी हैं। श्रीनगर के स्टॉल पर अचार, मशाले, बैग, पश्मीना शॉल, सूट आदि उत्पाद हैं।
मेले में मशीन से बना कोई उत्पाद नहीं
नाबार्ड जम्मू-कश्मीर की उपमहाप्रबंधक अनामिका के अनुसार, मेले में मशीन से बना कोई भी उत्पाद नहीं रखा गया है। स्थानीय लोगों को चाहिए कि वह मेले में पहुंचे कारीगरों को प्रोत्साहित करें।
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मधुबनी बिहार से युवा आकृति संगम के मधुबनी पेंटिंग स्टॉल पर उपलब्ध दुपट्टा, शॉल, पेपर पेंटिंग, हैंड बैग, पर्स, साड़ियां युवतियों और महिलाओं को खूब भा रहे। पेपर के ऊपर प्राकृतिक रंगों का प्रयोग है, जबकि कपड़ों पर पोस्टर कलर का प्रयोग है।
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हिमाचल प्रदेश के किनौर से आए रामकिशन कहते हैं कि वह पारंपरिक वस्त्रों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। स्टॉल पर उपलब्ध कोट, टोपी आदि कपड़े भेंड़ के ऊन से बने हैं, जो पसंद किए जा रह हैं।
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से आए मुजीब की म्यूजिक आर्ट्स लैंप भी आकर्षक हैं। मुजीब बताते हैं कि इस लैंप की रोशनी से कीड़े या मच्छर नहीं आते। इनपर म्यूजिक आर्ट बना है। उत्तरप्रदेश के बागपत से आए दिलशाद का हैंडलूम प्रोडक्ट है। इसमें डबल बेड कवर, बेडशीट, कुशन कवर शामिल हैं। इनकी खासियत है कि ये गर्मी में ठंडा और सर्दी में गरम रहते हैं। मुजीब के अनुसार मेले में लोगों को वाजिब कीमत पर उत्पाद मिल रहे हैं।
पंजाब के स्टॉल पर बांस के अचार और मुरब्बे
कला शिल्प मेले में पंजाब की रेणु शर्मा की अचार की स्टॉल है, जहां 65 प्रकार के अचार हैं। इसके अलावा मुरब्बा, आंवला कैंडी, एलोवेरा जूस भी हैं। बांस के अचार और मुरब्बे भी है। स्टॉल पर यह 60 से 400 रुपये तक में उपलब्ध हैं। झारखंड के जामताड़ा की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने भी स्टॉल लगाया है, जहां वुलेन जैकेट, कॉटन के कुर्ते, पजामे, शर्ट सभी साइज में उपलब्ध हैं।
हाथों की कारीगरी लोगों को कर रही आकर्षित
पंचकुला की परमजीत के स्टॉल पर दरी, मैट, डोर मैट आदि हैं। इन पर हाथों की कारीगरी देखते बनती है। पलवल के स्टॉल पर जयपुरिया रजाई, हैंडमेड बेड शीट आदि हैं। बिहार के समस्तीपुर से आई मधु देवी का मधुबनी-मिथिला आर्ट का स्टॉल है। यहां न्यूनतम सौ रुपये से अधिकतम 500 रुपये तक की पेपर, कैनवास पर बनी पेंटिंग उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त सिल्क की साड़ी, दुपट्टा, स्टॉल, सूट, तकिये का कवर, बेड शीट भी हैं। श्रीनगर के स्टॉल पर अचार, मशाले, बैग, पश्मीना शॉल, सूट आदि उत्पाद हैं।
मेले में मशीन से बना कोई उत्पाद नहीं
नाबार्ड जम्मू-कश्मीर की उपमहाप्रबंधक अनामिका के अनुसार, मेले में मशीन से बना कोई भी उत्पाद नहीं रखा गया है। स्थानीय लोगों को चाहिए कि वह मेले में पहुंचे कारीगरों को प्रोत्साहित करें।