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शराब और मांस का सेवन सोचने की गति कम करता है
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ज्यौड़ियां। खौड़ स्थित साहिब बंदगी आश्रम में बुधवार को सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग कोरोना के चलते दो साल से बंद था। इसमें सैकड़ों को संख्या में लोगों ने भाग लिया और सद्गुरु मधु परमहंस का प्रवचन सुना। सद्गुरु मधु परमहंस ने कहा कि शराब और मांस का सेवन करना पाप तो है ही, साथ में इसका सेवन करने से इंसान के दिमाग के काम करने की गति भी कम हो जाती है।
सद्गुरु ने कहा कि इंसान गलतियों का पुतला है। हम आप जीवन के पथिक हैं। हम सभी एक व्यवस्था का पालन करते हैं। पूर्वजों ने हमें बहुत कुछ दिया है। प्रेम, मर्यादा सब प्रतीक के रूप में हैं। कहीं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं, तो कहीं लीला प्रधान श्रीकृष्ण हैं। इसके पहले भी बहुत से महा पुरुष हुए हैं जो अपनी-अपनी लीला करके चले गए। आज भी बहुत से महापुरुष हैं जो लीलाएं कर रहें हैं, लेकिन आपको वह इसलिए दिखाई नहीं देते, क्योंकि आंखों को बंद कर रखा है। अपने अंदर छिपी उस पुण्यता को स्वीकार नहीं करते हैं। आप भ्रमित होकर यहां वहां पूछने जाते हैं। इसलिए आप कमजोर हो जाते हैं। यदि आपको अपनी साधना पर विश्वास है, आस्था है, तो आपको रास्ता जरूर मिलेगा। यदि आप भटके हुए हैं, और प्रभु की खोज कर रहे हैं। तो प्रकृति आपको कभी भी उस परमात्मा से नहीं मिलने देगी, क्योंकि आपके चले जाने से उसको खो जाने का डर है। प्रकृति सोचती है कि यदि सभी मनुष्य बुद्धिमान हो जाएं तो यह चंचलता नहीं रहेगी।
सत्संग में हजारों की संख्या में संगत उपस्थित रही। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया।
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सद्गुरु ने कहा कि इंसान गलतियों का पुतला है। हम आप जीवन के पथिक हैं। हम सभी एक व्यवस्था का पालन करते हैं। पूर्वजों ने हमें बहुत कुछ दिया है। प्रेम, मर्यादा सब प्रतीक के रूप में हैं। कहीं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं, तो कहीं लीला प्रधान श्रीकृष्ण हैं। इसके पहले भी बहुत से महा पुरुष हुए हैं जो अपनी-अपनी लीला करके चले गए। आज भी बहुत से महापुरुष हैं जो लीलाएं कर रहें हैं, लेकिन आपको वह इसलिए दिखाई नहीं देते, क्योंकि आंखों को बंद कर रखा है। अपने अंदर छिपी उस पुण्यता को स्वीकार नहीं करते हैं। आप भ्रमित होकर यहां वहां पूछने जाते हैं। इसलिए आप कमजोर हो जाते हैं। यदि आपको अपनी साधना पर विश्वास है, आस्था है, तो आपको रास्ता जरूर मिलेगा। यदि आप भटके हुए हैं, और प्रभु की खोज कर रहे हैं। तो प्रकृति आपको कभी भी उस परमात्मा से नहीं मिलने देगी, क्योंकि आपके चले जाने से उसको खो जाने का डर है। प्रकृति सोचती है कि यदि सभी मनुष्य बुद्धिमान हो जाएं तो यह चंचलता नहीं रहेगी।
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सत्संग में हजारों की संख्या में संगत उपस्थित रही। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया।