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एह देश सहाडा बर्बाद होआ दा...
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अखनूर। डोगरी भाषा के युवा साहित्यकारों ने गूगल मीट पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता नीतिका नीतूू और संचालन रेणू शर्मा ने किया।
गोष्ठी में करीब 20 कवियों ने कविता पाठ किये। कवियित्री नितिका नीतू ने मेरे बागैं दा तूं हैं पक्खरू अक्खियां दा बगदा तूं हैं अत्थरू... कविता प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके साथ ही कवियित्री रेणु शर्मा ने एह देश सहाडा बर्बाद होआ दा, सुते दा तु जाग मानुआ। देशे लेई किश करी जा, होशे गी संभाल मानुआ प्रस्तुत की। कवि अनिल कुमार ने दुनियां एह केह करन लग्गी ऐ, मेरी रूह डरन लग्गी ऐ। जिस माऊंगी अस पुज्जनें आं, ओह् कोख च गै मरन लग्गी ऐ। धीयां पुत्तर इक सम्मान, इक गै रूह, इक गै जान प्रस्तत की।
इसके अलावा श्रीरका ठाकुर, नेहा वर्मा, शिवानी शर्मा, दीक्षा कलूरिया, भारती देवी, रितु देवी, कविता देवी, अजय शर्मा नेहा पराग आदि ने कविता पढ़ी। गोष्ठी का आयोजन मोहन सिंह जमवाल ने कराया। मोहन सिंह ने कहा कि डोगरी भाषा में बहुत सारे ऐसे युवा साहित्यकार हैं जो डोगरी भाषा में लिख रहे हैं। उनको भी आगे लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ताकि डोगरी भाषा साहित्य और अपने रीतिरिवाजों से रूब-बरू हो सकें । नितिका नित्तू ने कहा कि अगर हम साहित्यकारों को पढ़ें तो हमें भी लिखने और बोलने में बढ़ोतरी और पढ़ने से ज्ञान और साहित्य की जानकारी मिलती है। नए लेखकों को बहुत सारी शुभकामनाएं दीं। अनिल वर्मा ने भी विचार साझे किए।
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गोष्ठी में करीब 20 कवियों ने कविता पाठ किये। कवियित्री नितिका नीतू ने मेरे बागैं दा तूं हैं पक्खरू अक्खियां दा बगदा तूं हैं अत्थरू... कविता प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके साथ ही कवियित्री रेणु शर्मा ने एह देश सहाडा बर्बाद होआ दा, सुते दा तु जाग मानुआ। देशे लेई किश करी जा, होशे गी संभाल मानुआ प्रस्तुत की। कवि अनिल कुमार ने दुनियां एह केह करन लग्गी ऐ, मेरी रूह डरन लग्गी ऐ। जिस माऊंगी अस पुज्जनें आं, ओह् कोख च गै मरन लग्गी ऐ। धीयां पुत्तर इक सम्मान, इक गै रूह, इक गै जान प्रस्तत की।
इसके अलावा श्रीरका ठाकुर, नेहा वर्मा, शिवानी शर्मा, दीक्षा कलूरिया, भारती देवी, रितु देवी, कविता देवी, अजय शर्मा नेहा पराग आदि ने कविता पढ़ी। गोष्ठी का आयोजन मोहन सिंह जमवाल ने कराया। मोहन सिंह ने कहा कि डोगरी भाषा में बहुत सारे ऐसे युवा साहित्यकार हैं जो डोगरी भाषा में लिख रहे हैं। उनको भी आगे लाने के प्रयास किए जाने चाहिए। ताकि डोगरी भाषा साहित्य और अपने रीतिरिवाजों से रूब-बरू हो सकें । नितिका नित्तू ने कहा कि अगर हम साहित्यकारों को पढ़ें तो हमें भी लिखने और बोलने में बढ़ोतरी और पढ़ने से ज्ञान और साहित्य की जानकारी मिलती है। नए लेखकों को बहुत सारी शुभकामनाएं दीं। अनिल वर्मा ने भी विचार साझे किए।
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