कश्मीर के लिए आज हो सकती है कयामत की रात
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कश्मीर घाटी में मंगलवार देर शाम से मूसलाधार बारिश हो रही है। झेलम नदी के साथ-साथ अन्य नदी-नालों का जलस्तर भले ही न बढ़ा हो लेकिन प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दे दिए हैं। खासकर उन्हें जो नदी नालों के आस पास रह रहे हैं। मौसम विभाग ने चार अप्रैल तक भारी बारिश होने की भविष्यवाणी की है, जिसमें से एक और तीन अप्रैल को घाटी में सामान्य से लेकर भारी बारिश हो सकती है।
इसे ध्यान में रखते हुए कई इलाकों से तो लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन भी शुरू कर दिया है। लोगों के अनुसार, उन्हें पिछली बार बाढ़ से काफी नुकसान हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, एक और दो अप्रैल की दरमियानी रात काफी महत्वपूर्ण है। विभाग के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि आज की रात काफी संकटपूर्ण रात हो सकती है। घाटी के अधिकतर हिस्सों में काफी भीषण बारिश होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि घाटी के ऊपर काफी घना पश्चिमी दबाव बना है जो देर रात गए और घना हो सकता है, जिससे भीषण बारिश हो सकती है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ के अलावा अन्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि आखिरी खबरें मिलने तक झेलम नदी का जल स्तर खतरे के निशान से नीचे था।
क्षतिग्रस्त ढांचे पर फिर बाढ़ का खतरा
अभी पिछली बाढ़ और बारिश की मार झेल चुके ढांचे को दुरुस्त नहीं किया कि फिर जोरदार बारिश ने ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। पिछले साल सितंबर में आई बाढ़ के कारण 150 छोटे-छोटे पुल जम्मूू संभाग में बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। इनमें पुंछ, बुद्धल, जम्मू के भगवती नगर का चौथा पुल, बरजाला चक का पुल, कुंजवानी का पुल बह गया था। इन पुलों का अभी तक निर्माण नहीं हुआ।
पीडब्ल्यूडी विभाग ने योजना बनाई थी कि इन पुलों को बरसात के सीजन से पहले इस्तेमाल करने योग्य बना दिया जाएगा। लेकिन पिछले दो हफ्तों से होने वाली बारिश ने इन पुलों की मरम्मत को तहस-नहस कर दिया है। जम्मू के बरजाला चक का पुल तो अभी बना ही नहीं। यहां सेना की ओर से बनाया अस्थायी पुल भी बह गया।
भगवती नगर के चौथे पुल का भी एक हिस्सा टूट गया, इसको भी अभी नहीं बनाया गया। कुंजवानी में भी पुल का हिस्सा मलबा डालकर भरा गया, लेकिन अभी इसका काम शुरू नहीं हुआ। लोक निर्माण राज्यमंत्री सुनील कुमार ने बताया कि अभी भी बारिश से बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
विभाग चाहता है कि बरसात का सीजन शुरू होने से पहले इन पुलों का काम शुरू कर दिया जाए। जहां पर अस्थायी पुलों की आवश्यकता है, उसका काम शुरू किया जाए, लेकिन बारिश कुछ करने नहीं दे रही।
यहां पढ़ें, नदियों का जल स्तर
जल स्तर में रिकॉर्ड की गई कमी (30 मार्च रात 10 बजे से लेकर एक अप्रैल शाम 5 बजे तक)
30 मार्च रात 10 बजे का झेलम नदी का जल स्तर
* संगम - 19.8 फीट (खतरे का निशान 23 फीट)
* राम मुंशीबाग - 19.5 फीट (खतरे का निशान 19 फीट)
* अशम - 12.85 फीट (खतरे का निशान 15 फीट)
एक अप्रैल शाम 5 बजे का झेलम नदी का जल स्तर
* संगम - 10.75 फीट (खतरे का निशान 23 फीट)
* राम मुंशीबाग - 14.80 फीट (खतरे का निशान 19 फीट)
* अशम - 11.25 फीट (खतरे का निशान 15 फीट)
जल स्तर में कमी
* संगम - 9.05 फीट
* राम मुंशीबाग - 4.7 फीट
* अशम - 1.6 फीट