सड़क हादसे में जवान और पुलिस वाले की मौत
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इस हादसे में पुलिस जवान गब्बा राम जो निवासी समराल तहसील अखनूर की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तुरण सिंह चिब निवासी ढक्कूचक्क दोमाना की जीएमसी में इलाज के दौरान मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गब्बा राम मोटर साइकिल नंबर जेके02ऐएल 5016 पर सवार होकर दोमाना से जम्मू की ओर जा रहा था। उसे नगरोटा पुलिस स्टेशन अपनी डयुटी पर जाना था।
जबकि एक अन्य बुल्लेट मोटर साइकिल नंबर जेके02बीसी 1783 पर सवार तीन युवा भी दोमाना से जम्मू की ओर जा रहे थे। पटोली ब्राह्मणा पहुंचने पर सामने से आ रही गाड़ी से बचने के लिए बुल्लेट मोटरसाइकिल साथ चल रही गब्बा राम की मोटर साइकिल से टकरा गई।
पुलिससि वाले की मौके पर मौत
इस टक्कर के बाद सड़क पर जाम लग गया। लोगों ने बुल्लेटमोटर साइकिल सवार तीनों युवाओं को अस्पताल पहुंचाया अस्पताल में इलाज के दौरान तरुण सिंह चिब की मौत हो गई।
दो अन्य अजय शर्मा और चक्क मलाल खौड़ निवासी अजय सिंह को भी गंभीर चोटें आई हैं। तीनों घायलों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। जबकि मृतक गब्बा राम के शव को दोमाना थाना प्रभारी की जिप्सी में अस्पताल में ले जाया गया।
दो दिन पहले छुट्टी पर आया था तरुण
तरुण सिंह चिब दो दिन पहले छुट्टी लेकर जम्मू आया था। वह श्रीनगर में तैनात था। पिता और मां के साथ छुट्टी आने से पहले कई काम जम्मू आकर करने की सोची थी।
तरुण सिंह चिब अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। तरुण से बड़ी दो बहनों की शादी हो चुकी है। रो रो कर पूरे परिवार के लोगों का बुरा हाल था।
तरुण के ताया और ताई भी इमरजेंसी में लगातार विलाप कर रहे थे। जवान बेटे की मौत से तरुण के पिता राजिंद्र सिंह पर मानों का दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो।
पिता बोले, जीने का मकसद नहीं रहा, मुझे गोली मार दो
बेटे की मौत से टूटे पिता राजिंद्र सिंह पोस्टमार्टम न करवाने की जिद पर अड़े थे। हालांकि वह खुद भी आर्मी के रिटायर कर्मचारी रह चुके है।
बचपन में बेटे को अपने हाथ से देसी घी शक्कर की चूरी खिलाने वाली मां कांता देवी सोमवार को अपने बेटे के खून से अपने हाथ लाल किए रोई जा रही थी।
जवान बेटे की मौत का कहर परिवार पर इस कद्र टूटा कि मां बाप खुद की जिंदगी को व्यर्थ बताने लगे। मां कांता देवी हर नजदीक आने वाले को यह कहती रही कि ‘कोई तां उठालो मेरे पुत नूं’।
बेटे के चेहरे पर लगे खून के निशान अपने दुप्पटे से साफ करने का प्रयास करती रही। लेकिन घाव भरने और खून साफ होने का फायदा ही नहीं था।
नम हो गई मौजूद तीमारदारों की आंखें
अस्पताल में मौजूद मरीजों के तीमारदारों की आंखें भी नम हो गई। अस्पताल की स्टाफ नर्सें व अन्य लोग मां-बाप, भतीजे को विलाप करता देख खुद को रोने से नहीं रोक सके।
इस दौरान हर कोई अपना दुख दर्द और गम भूलकर गहर कोई बेटे की मौत से हारे मां-बाप को देखकर उनका दुख करने की सोच रहा था।
तरुण की भाभी विजय चिब का भी रो रोकर बुला हाल था। हाथ की मुट्ठी स्टेचर को पकड़कर वह भी जमीन पर पड़ी रही। फिर देवर तरुण के जूते देख रोती रही।
उन्होंने बताया कि ननदों की शादी के बाद देवर के सिर पर शादी का सेहरा सजाने की तैयारी में थे, लेकिन अनहोनी को कुछ और ही मंजूर था।