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Jammu News: किरू प्रोजेक्ट घोटाले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका खारिज

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- कोर्ट ने कहा जांच हो सकती है प्रभावित
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जम्मू। बहुचर्चित किरू जलविद्युत परियोजना घोटाले में विशेष न्यायाधीश सीबीआई जम्मू बाला ज्योति ने दिल्ली के दो आरोपियों सुमित व अरुण कुमार की गिरफ्तारी पूर्व जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सरकारी अधिवक्ता मनमोहन शर्मा ने तर्क दिया कि वर्तमान आवेदन किसी भी कानूनी बल से रहित होने के कारण चर्चा योग्य नहीं है। इस आधार पर जमानत याचिका को खारिज किया जाए। वास्तव में मामले की रूपरेखा यह है कि 23 मार्च 2022 को किरू हाइड्रो प्रोजेक्ट के सिविल कार्यों के संबंध में अनुबंध देने में आरोपों की सीबीआई द्वारा जांच की गई। इलेक्ट्रिक पावर परियोजना, एंटी करप्शन ब्यूरो और बिजली विकास विभाग की रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई हुई।

जम्मू-कश्मीर सरकार और इन रिपोर्टों के गहन अध्ययन से पता चलता है कि किरू जलविद्युत परियोजना के सिविल कार्यों के संबंध में अनुबंध देने में ई-टेंडरिंग के संबंध में दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया था। वहीं, चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट लिमिटेड की 47वीं बोर्ड बैठक में एक निर्णय लिया गया था। इसके बाद नीलामी के साथ ई-टेंडरिंग के माध्यम से पुन: निविदा के लिए चल रही निविदा प्रक्रिया को रद्द करने के बाद इसे लागू नहीं किया गया। आगे बताया कि उक्त शिकायत प्राप्त होने के बाद नियमित मामला 20 अप्रैल 2022 को फिर से दर्ज किया गया था।
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इसमें नवीन कुमार चौधरी तत्कालीन अध्यक्ष चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएस बाबू तत्कालीन प्रबंध निदेशक सीवीपीपीपीएल, अरुण कुमार मिश्रा तत्कालीन निदेशक सीवीपीपीपीएल, मेसर्स पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड एटीजेडी और अन्य पर शिकायत दर्ज की गई थी। जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पीसी अधिनियम 2006 और जम्मू-कश्मीर आरपीसी की धारा 120-बी के 5(एलडी) आरडब्ल्यू 5(2) के तहत मामला दर्ज हुआ।सीबीआई विशेष न्यायाधीश सीबीआई बाला ज्योति ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोपों की प्रकृति और आरोप की गंभीरता जांच के चरण को ध्यान में रखते हुए इस न्यायालय का दृढ़ मत है कि जांच एजेंसी को विश्लेषण और प्रभावी जांच करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उपरोक्त के मद्देनजर वर्तमान आवेदन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अंतरिम सुरक्षा नहीं दी जा सकती है क्योंकि इससे जांच एजेंसी को आरोपी व्यक्तियों, आवेदक से पूछताछ करने और उपयोगी जानकारी और सामग्री का चयन करने परेशानी आ सकती है। जेएनएफ
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मामले में हो सकती हैं गिरफ्तारियां
मामले में आरोपी गिरफ्तार हो सकते हैं। मामले में जांच तेज गति से चल रही है। टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरती गई है। नियमों को दर किनार किया गया है। जांच के बाद संलिप्ता पाए जाने के बाद गिरफ्तारी हो सकती है।
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