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चरस के साथ पकड़े आरोपी को कोर्ट ने मुक्त किया
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जम्मू। हाईकोर्ट जम्मू ने चरस के तस्कर को जुर्म साबित न होने पर बरी कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ केस साबित नहीं कर सका है। द्वितीय अतिरिक्त सेशन जज वीरेंद्र सिंह भाऊ ने आरोपी राजेश सिंह निवासी अखनूर को रिहा कर दिया।
इससे पहले आरोपी के वकील प्रिंस खन्ना और सुमित खजूरिया ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि इस मामले में चरस के सैंपल को एफएसएल के पास 9 दिन देरी से भेजा। एफएसएल की रिपोर्ट कहती है कि उनके पास 8 मई को सैंपल पहुंचा था, जबकि आरोपी से 29 अप्रैल को चरस बरामद हुई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का नियम कहता है कि सैंपल को 72 घंटों के भीतर एफएसएल के पास पहुंचाना होता है। लेकिन जांच अधिकारी ने तय समय के बीच सैंपल को नहीं भेजा। कोर्ट ने महसूस किया कि इस मामले में पेश किए गए सबूत भी आपस में मेल नहीं खाते। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अभियोजन पक्ष केस साबित करने में असफल हुआ है। आरोपी के खिलाफ चूंकि आरोप साबित नहीं होते हैं लिहाजा उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। जानीपुर पुलिस ने आरोपी को नाके पर 735 ग्राम चरस के साथ पकड़ा था। जेएनएफ
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इससे पहले आरोपी के वकील प्रिंस खन्ना और सुमित खजूरिया ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि इस मामले में चरस के सैंपल को एफएसएल के पास 9 दिन देरी से भेजा। एफएसएल की रिपोर्ट कहती है कि उनके पास 8 मई को सैंपल पहुंचा था, जबकि आरोपी से 29 अप्रैल को चरस बरामद हुई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का नियम कहता है कि सैंपल को 72 घंटों के भीतर एफएसएल के पास पहुंचाना होता है। लेकिन जांच अधिकारी ने तय समय के बीच सैंपल को नहीं भेजा। कोर्ट ने महसूस किया कि इस मामले में पेश किए गए सबूत भी आपस में मेल नहीं खाते। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अभियोजन पक्ष केस साबित करने में असफल हुआ है। आरोपी के खिलाफ चूंकि आरोप साबित नहीं होते हैं लिहाजा उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। जानीपुर पुलिस ने आरोपी को नाके पर 735 ग्राम चरस के साथ पकड़ा था। जेएनएफ
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