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Jammu News: पीएससी से कॉलेज प्राचार्यों का चयन सही पिछली तारीख से कन्फर्मेशन के आदेश
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हाईकोर्ट ने सालों तक ऊंचे पदों पर काम के बाद रिटायर्ड प्रिंसिपलों के मामले में दिया फैसला
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी डिग्री कॉलेजों से एक अहम फैसले में हाईकोर्ट ने पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) से हुए कॉलेज प्रिंसिपलों के चयन और नियुक्ति को सही ठहराया है। सालों तक ऊंचे पदों पर काम करने के बाद रिटायर हुए योग्य इंचार्ज प्रिंसिपलों के पिछली तारीख से कन्फर्मेशन आदेश दिए हैं।
जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने कहा कि वे बकाया वेतन के हकदार नहीं होंगे, लेकिन लागू नियमों के अनुसार रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ और पेंशन में संशोधन के हकदार होंगे। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), जम्मू बेंच के एक पुराने आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बेंच ने यह फैसला सुनाया। यह फैसला बीती 17 सितंबर को सुरक्षित रख लिया गया था।
ट्रिब्यूनल के 2017 के आदेश के तहत चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिए जाने और अधिकारियों को नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश के बाद यह मामला शुरू हुआ था। उसके इस फैसले को सरकार और चुने गए उम्मीदवारों डॉ. यास्मीन अशई और अन्य ने चुनौती दी थी।
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हाईकोर्ट ने पाया कि प्रिंसिपल के पद पर भर्ती का तरीका भर्ती नियमों में 2014 में हुए बदलाव से पहले और बाद में भी पीएससी या डीपीसी के जरिए चयन ही रहा। डिवीजन बेंच ने एड-हॉक यानी अस्थायी व्यवस्थाओं के लंबे समय तक चलने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। बेंच ने इससे जुड़ी अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया। जेएनएफ
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में सरकारी डिग्री कॉलेजों से एक अहम फैसले में हाईकोर्ट ने पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) से हुए कॉलेज प्रिंसिपलों के चयन और नियुक्ति को सही ठहराया है। सालों तक ऊंचे पदों पर काम करने के बाद रिटायर हुए योग्य इंचार्ज प्रिंसिपलों के पिछली तारीख से कन्फर्मेशन आदेश दिए हैं।
जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने कहा कि वे बकाया वेतन के हकदार नहीं होंगे, लेकिन लागू नियमों के अनुसार रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभ और पेंशन में संशोधन के हकदार होंगे। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), जम्मू बेंच के एक पुराने आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बेंच ने यह फैसला सुनाया। यह फैसला बीती 17 सितंबर को सुरक्षित रख लिया गया था।
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ट्रिब्यूनल के 2017 के आदेश के तहत चयन प्रक्रिया को रद्द कर दिए जाने और अधिकारियों को नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू किए जाने के निर्देश के बाद यह मामला शुरू हुआ था। उसके इस फैसले को सरकार और चुने गए उम्मीदवारों डॉ. यास्मीन अशई और अन्य ने चुनौती दी थी।
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हाईकोर्ट ने पाया कि प्रिंसिपल के पद पर भर्ती का तरीका भर्ती नियमों में 2014 में हुए बदलाव से पहले और बाद में भी पीएससी या डीपीसी के जरिए चयन ही रहा। डिवीजन बेंच ने एड-हॉक यानी अस्थायी व्यवस्थाओं के लंबे समय तक चलने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। बेंच ने इससे जुड़ी अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया। जेएनएफ