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Jammu News: पूर्व सरपंच केवल कृष्ण की जमानत याचिका खारिज
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- राजोरी में जानलेवा हमले का मामला, हाईकोर्ट ने कहा - आरोप गंभीर
जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने राजोरी के चर्चित जानलेवा हमले के मामले में आरोपी पूर्व सरपंच केवल कृष्ण की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता, आरोपी का आपराधिक इतिहास, अधूरी जांच और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
मामले में नामजद पांच अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। वारदात में इस्तेमाल हथियार अब तक बरामद नहीं हुए हैं। आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है जिसे जमानत आवेदन में पूरी तरह उजागर नहीं किया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। घटना के वक्त आरोपी अपने पेट्रोल पंप पर मौजूद था जिसका सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि लुधियाना अस्पताल से दोनों घायलों को छुट्टी मिल चुकी है, इसलिए परिस्थितियों में बदलाव आया है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि हमला पूरी तरह योजनाबद्ध था और जांच अभी जारी है। कोर्ट ने 11 जुलाई 2026 को प्रधान सत्र न्यायाधीश राजोरी की ओर से जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा। जस्टिस नरगल ने टिप्पणी की कि भले ही घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई हो, लेकिन घायल निखिल बख्शी का बयान अभी बाकी है और विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। कोर्ट ने कहा, हालांकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक बहुमूल्य सांविधानिक अधिकार है और विचाराधीन कैद को सजा का रूप नहीं दिया जा सकता, लेकिन जमानत भी बिना ठोस आधार के नियमित रूप से नहीं दी जा सकती। जेएनएफ
ये है पूरा मामला?
मामला इसी साल 12 जून 2026 का है। शिकायतकर्ता के अनुसार राजोरी निवासी तुषार शर्मा और निखिल बख्शी जब अपनी दुकान से लौट रहे थे, तब घात लगाकर उन पर हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने हॉकी स्टिक, धारदार हथियारों से उन पर हमला किया। घटना के बाद पुलिस थाना राजोरी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने राजोरी के चर्चित जानलेवा हमले के मामले में आरोपी पूर्व सरपंच केवल कृष्ण की जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता, आरोपी का आपराधिक इतिहास, अधूरी जांच और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
मामले में नामजद पांच अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। वारदात में इस्तेमाल हथियार अब तक बरामद नहीं हुए हैं। आरोपी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है जिसे जमानत आवेदन में पूरी तरह उजागर नहीं किया गया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। घटना के वक्त आरोपी अपने पेट्रोल पंप पर मौजूद था जिसका सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध है। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि लुधियाना अस्पताल से दोनों घायलों को छुट्टी मिल चुकी है, इसलिए परिस्थितियों में बदलाव आया है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि हमला पूरी तरह योजनाबद्ध था और जांच अभी जारी है। कोर्ट ने 11 जुलाई 2026 को प्रधान सत्र न्यायाधीश राजोरी की ओर से जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा। जस्टिस नरगल ने टिप्पणी की कि भले ही घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई हो, लेकिन घायल निखिल बख्शी का बयान अभी बाकी है और विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। कोर्ट ने कहा, हालांकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक बहुमूल्य सांविधानिक अधिकार है और विचाराधीन कैद को सजा का रूप नहीं दिया जा सकता, लेकिन जमानत भी बिना ठोस आधार के नियमित रूप से नहीं दी जा सकती। जेएनएफ
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ये है पूरा मामला?
मामला इसी साल 12 जून 2026 का है। शिकायतकर्ता के अनुसार राजोरी निवासी तुषार शर्मा और निखिल बख्शी जब अपनी दुकान से लौट रहे थे, तब घात लगाकर उन पर हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने हॉकी स्टिक, धारदार हथियारों से उन पर हमला किया। घटना के बाद पुलिस थाना राजोरी में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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