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Jammu News: आदतन अपराधी जुंगी पर लगा पीएसए रहेगा बरकरार
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- 12 एफआईआर में नाम, छह सीधे तौर पर दर्ज, सामान्य कानूनी कार्रवाई का कोई असर नहीं हो रहा
जम्मू। कुख्यात अपराधी परमजीत कुमार उर्फ जुगी पर लगा पीएसए बरकरार रहेगा। मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने और जबरन वसूली से संबंधित तीन मामलों समेत जुंगी का 12 एफआईआर में नाम है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि आरोपी का रिकाॅर्ड साफ बताता है कि वह बार बार अपराध करता है। जिस पर सामान्य कानूनी धाराओं का कोई असर नहीं। लिहाजा इस पीएसए होना चाहिए। जुंगी आरएस पुरा के गांव दरपाते का रहने वाला है। जिस पर पुलिस स्टेशन मीरां साहिब, आरएस पुरा में छह एफआईआर दर्ज हैं। वर्ष 2011 से लेकर 2023 तक वह लगातार अपराधों में शामिल हो रहा है।
इससे पहले दोनों तरफ के वकीलों की बहस हुई। अपीलकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि पीएसए के दस्तावेज पूरी तरह से अपीलकर्ता को नहीं दिखाए गए और न ही समझाए गए। इसका जवाब देते हुए सरकारी वकील ने कहा कि दस्तावेजों पर अपीलकर्ता के हस्ताक्षर हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को हिरासत के आधार का आधार बनने वाली संपूर्ण सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसी तरह हिरासत में लिए गए व्यक्ति का यह तर्क भी निराधार है कि उसे उस भाषा में हिरासत का आधार नहीं समझाया गया जिसे वह समझता है। न केवल निष्पादन रिपोर्ट यह प्रदान करती है कि निष्पादन अधिकारी ने हिरासत में लिए गए लोगों को हिंदी और डोगरी भाषाओं में हिरासत के आधारों को पढ़ा और समझाया है, बल्कि निष्पादन अधिकारी का हलफनामा भी है जो हिरासत रिकॉर्ड में उपलब्ध है। जो इसकी पुष्टि करता है। दलीलें सुनने के बाद जज ने कहा कि न्यायालय को हिरासत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। याचिका में योग्यता नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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जम्मू। कुख्यात अपराधी परमजीत कुमार उर्फ जुगी पर लगा पीएसए बरकरार रहेगा। मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार रखने और जबरन वसूली से संबंधित तीन मामलों समेत जुंगी का 12 एफआईआर में नाम है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजय धर ने कहा कि आरोपी का रिकाॅर्ड साफ बताता है कि वह बार बार अपराध करता है। जिस पर सामान्य कानूनी धाराओं का कोई असर नहीं। लिहाजा इस पीएसए होना चाहिए। जुंगी आरएस पुरा के गांव दरपाते का रहने वाला है। जिस पर पुलिस स्टेशन मीरां साहिब, आरएस पुरा में छह एफआईआर दर्ज हैं। वर्ष 2011 से लेकर 2023 तक वह लगातार अपराधों में शामिल हो रहा है।
इससे पहले दोनों तरफ के वकीलों की बहस हुई। अपीलकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि पीएसए के दस्तावेज पूरी तरह से अपीलकर्ता को नहीं दिखाए गए और न ही समझाए गए। इसका जवाब देते हुए सरकारी वकील ने कहा कि दस्तावेजों पर अपीलकर्ता के हस्ताक्षर हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को हिरासत के आधार का आधार बनने वाली संपूर्ण सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसी तरह हिरासत में लिए गए व्यक्ति का यह तर्क भी निराधार है कि उसे उस भाषा में हिरासत का आधार नहीं समझाया गया जिसे वह समझता है। न केवल निष्पादन रिपोर्ट यह प्रदान करती है कि निष्पादन अधिकारी ने हिरासत में लिए गए लोगों को हिंदी और डोगरी भाषाओं में हिरासत के आधारों को पढ़ा और समझाया है, बल्कि निष्पादन अधिकारी का हलफनामा भी है जो हिरासत रिकॉर्ड में उपलब्ध है। जो इसकी पुष्टि करता है। दलीलें सुनने के बाद जज ने कहा कि न्यायालय को हिरासत के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। याचिका में योग्यता नहीं है और इसलिए इसे खारिज किया जाता है। जेएनएफ
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