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Jammu News: बीएसएफ कांस्टेबल की बर्खास्तगी रद्द, सभी लाभ देने का आदेश
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हाईकोर्ट ने कहा - सारांश सुरक्षा बल न्यायालय ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए सक्षम नहीं
जम्मू। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कांस्टेबल को 20 वर्ष नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया गया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एमए चौधरी ने कहा कि सारांश सुरक्षा बल न्यायालय ऐसे मामलों की सुनवाई करने के लिए सक्षम नहीं है। वर्ष 2004 में बीएसएफ की 55 बटालियन कमांडेंट ने कांस्टेबल सुमंत दत को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुमंत ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एमए चौधरी ने आदेश दिया कि सुमंत को नौकरी पर बहाल किया जाए। वह तब से नौकरी का हकदार है, जबसे उसे बर्खास्त किया गया। लिहाजा उसके पक्ष में पूरा वेतन जारी करें। उसे सेवाओं के सभी लाभ दिए जाएं। सारांश सुरक्षा बल न्यायालय द्वारा बिना क्षेत्राधिकार के फैसला करना कानून की नजर में अमान्य है। लिहाजा इसे सभी कार्यवाहियों के साथ रद्द कर दिया जाता है। याचिकाकर्ता सेवा में फिर से बहाल होने का हकदार है। चूंकि धारा 354 आरपीसी के तहत दंडनीय स्कूली बच्चियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का नागरिक अपराध एक गंभीर आरोप है, इसलिए उत्तरदाताओं को सक्षम सुरक्षा बल न्यायालय में याचिकाकर्ता के खिलाफ नए सिरे से आगे बढ़ने की स्वतंत्रता होगी। बकाया वेतन का भुगतान इस तथ्य के अधीन होगा कि क्या उत्तरदाता याचिकाकर्ता पर मुकदमा चलाने का विकल्प चुनते हैं या नहीं और यदि वे उस पर मुकदमा नहीं चलाते हैं, तो याचिकाकर्ता बर्खास्तगी की तारीख से अपनी बहाली तक पूर्ण वेतन पाने का हकदार होगा। जेएनएफ
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जम्मू। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कांस्टेबल को 20 वर्ष नौकरी पर बहाल करने का आदेश दिया गया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एमए चौधरी ने कहा कि सारांश सुरक्षा बल न्यायालय ऐसे मामलों की सुनवाई करने के लिए सक्षम नहीं है। वर्ष 2004 में बीएसएफ की 55 बटालियन कमांडेंट ने कांस्टेबल सुमंत दत को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। इस फैसले को सुमंत ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
इस पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एमए चौधरी ने आदेश दिया कि सुमंत को नौकरी पर बहाल किया जाए। वह तब से नौकरी का हकदार है, जबसे उसे बर्खास्त किया गया। लिहाजा उसके पक्ष में पूरा वेतन जारी करें। उसे सेवाओं के सभी लाभ दिए जाएं। सारांश सुरक्षा बल न्यायालय द्वारा बिना क्षेत्राधिकार के फैसला करना कानून की नजर में अमान्य है। लिहाजा इसे सभी कार्यवाहियों के साथ रद्द कर दिया जाता है। याचिकाकर्ता सेवा में फिर से बहाल होने का हकदार है। चूंकि धारा 354 आरपीसी के तहत दंडनीय स्कूली बच्चियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का नागरिक अपराध एक गंभीर आरोप है, इसलिए उत्तरदाताओं को सक्षम सुरक्षा बल न्यायालय में याचिकाकर्ता के खिलाफ नए सिरे से आगे बढ़ने की स्वतंत्रता होगी। बकाया वेतन का भुगतान इस तथ्य के अधीन होगा कि क्या उत्तरदाता याचिकाकर्ता पर मुकदमा चलाने का विकल्प चुनते हैं या नहीं और यदि वे उस पर मुकदमा नहीं चलाते हैं, तो याचिकाकर्ता बर्खास्तगी की तारीख से अपनी बहाली तक पूर्ण वेतन पाने का हकदार होगा। जेएनएफ
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