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Jammu News: उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद उसपर सवाल नहीं उठा सकते
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-टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने कांस्टेबल भर्ती मामले में कैट का आदेश किया रद्द
जम्मू। जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भाग लेता है, वह प्रक्रिया समाप्त होने के बाद इस पर सवाल नहीं उठा सकता। इस सख्त टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने बुधवार को सिपाही भर्ती मामले में कैट के आदेश को रद्द कर दिया।
कैट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस कांस्टेबल पद पर भर्ती के खिलाफ दायर याचिकाकर्ताओं की रिट के आधार चयन और परिणामी नियुक्ति को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही उत्तरदाताओं को जम्मू-कश्मीर गैर-राजपत्रित भर्ती नियमों के अनुसार, नए सिरे से चयन प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरा करने का आदेश दिया था।
खंडपीठ ने कैट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करते हुए कहा, यह स्थापित कानून है कि कोई व्यक्ति जो पूरी समझदारी के साथ चयन प्रक्रिया में भाग लेता है वह संपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह से जानता है। वह बाद में पलटकर चयन की विधि और परिणाम पर सवाल नहीं उठा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई निर्णयों में दोहराया है कि एक बार चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद कोई उम्मीदवार ग्रेड बनाने में असफल होने पर उस पर सवाल नहीं उठा सकता है। खंडपीठ ने सुरेश कुमार बनाम हरियाणा राज्य का भी संदर्भ दिया। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया के दौरान दुर्भावना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। जेएनएफ
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युवाओं को सूचित करने के बाद किया गया ऑन स्पॉट चयन
हालांकि, वर्तमान मामले में विशेष क्षेत्रों में रहने वाले उम्मीदवारों का ऑन स्पॉट चयन उन क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को चौकीदार और लंबरदार द्वारा सूचित किए जाने के बाद किया गया था। इसलिए उक्त निर्णय वर्तमान मामले के तथ्यों पर लागू नहीं होता है।
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जम्मू। जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में भाग लेता है, वह प्रक्रिया समाप्त होने के बाद इस पर सवाल नहीं उठा सकता। इस सख्त टिप्पणी के साथ जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ताशी रबस्तान और न्यायमूर्ति पुनीत गुप्ता की खंडपीठ ने बुधवार को सिपाही भर्ती मामले में कैट के आदेश को रद्द कर दिया।
कैट ने जम्मू-कश्मीर पुलिस कांस्टेबल पद पर भर्ती के खिलाफ दायर याचिकाकर्ताओं की रिट के आधार चयन और परिणामी नियुक्ति को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही उत्तरदाताओं को जम्मू-कश्मीर गैर-राजपत्रित भर्ती नियमों के अनुसार, नए सिरे से चयन प्रक्रिया चार सप्ताह में पूरा करने का आदेश दिया था।
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खंडपीठ ने कैट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करते हुए कहा, यह स्थापित कानून है कि कोई व्यक्ति जो पूरी समझदारी के साथ चयन प्रक्रिया में भाग लेता है वह संपूर्ण प्रक्रिया को पूरी तरह से जानता है। वह बाद में पलटकर चयन की विधि और परिणाम पर सवाल नहीं उठा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई निर्णयों में दोहराया है कि एक बार चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद कोई उम्मीदवार ग्रेड बनाने में असफल होने पर उस पर सवाल नहीं उठा सकता है। खंडपीठ ने सुरेश कुमार बनाम हरियाणा राज्य का भी संदर्भ दिया। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने चयन प्रक्रिया के दौरान दुर्भावना और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। जेएनएफ
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युवाओं को सूचित करने के बाद किया गया ऑन स्पॉट चयन
हालांकि, वर्तमान मामले में विशेष क्षेत्रों में रहने वाले उम्मीदवारों का ऑन स्पॉट चयन उन क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं को चौकीदार और लंबरदार द्वारा सूचित किए जाने के बाद किया गया था। इसलिए उक्त निर्णय वर्तमान मामले के तथ्यों पर लागू नहीं होता है।