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जम्मू: जीएमसी प्रिंसिपल की बढ़ीं मुश्किलें अग्रिम जमानत याचिका खारिज, जन्मतिथि प्रमाणपत्र में धांधली का आरोप

Tue, 11 Jul 2023 05:04 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Tue, 11 Jul 2023 05:04 PM IST
सार

जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन शर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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Jammu GMC principal's difficulties increased, anticipatory bail plea rejected
जीएमसी जम्मू (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जीएमसी जम्मू की प्रिंसिपल डॉ. शशि सूदन शर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने जन्मतिथि में हेरफेर मामले में कोर्ट में याचिका दायर की थी। विशेष न्यायाधीश एसीबी जम्मू ताहिर खुर्शीद रैना ने इस मामले पर सुनवाई की।
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डॉ. सूदन के की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रणव कोहली और एसीबी की तरफ से सहायक अभियोजक इरशाद अहमद की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जमानत देने या अस्वीकार करने के आदेश में दो परस्पर विरोधी हितों पर ध्यान देना होगा। यानी कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की पवित्रता के बीच एक अच्छा संतुलन प्रतिबिंबित होना चाहिए। कहा गया कि जब तथ्यों के संदर्भ में देखा जाता है तो अदालत के पास आरोपी को दी जाने वाली गिरफ्तारी पूर्व जमानत की याचिका बरकरार रखने का कोई औचित्य नहीं दिखता है। छह जुलाई, 2023 के आदेश के तहत दी गई अंतरिम जमानत को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
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मामले की गंभीरता आवेदक की जन्मतिथि के विवाद पर आधारित है, जो वर्तमान में मेडिकल कॉलेज जम्मू में प्रिंसिपल के प्रतिष्ठित पद पर हैं। रिपोर्ट और सीडी फाइल से अनुमान लगाया गया है कि जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की ओर से जारी मैट्रिकुलेशन डिप्लोमा में दर्ज जन्मतिथि आठ अप्रैल 1965 है। इस मामले में यह आरोप लगाया गया है कि जन्मतिथि के अनुसार डॉ. सूदन वर्ष 1981 में एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य थीं, क्योंकि 31 दिसंबर, 1981 को उनकी 17 वर्ष की योग्य आयु नहीं थी।
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इस मामले में यह भी सामने आया है कि उन्होंने 1981 में जेके बोस से अपनी जन्मतिथि सही कराई, जिससे उन्हें अपना नया जन्मतिथि प्रमाणपत्र हासिल हुआ। इसमें जन्मतिथि आठ अप्रैल, 1964 कर दी गई। इस संशोधित जन्मतिथि प्रमाणपत्र के आधार पर वह एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा में बैठने के लिए पात्र हो गईं और वह इसमें शामिल हुईं। तमाम दलीलों को सुनने के बाद एसीबी कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं, इस मामले में पुलिस की ओर से इस मामले में प्रभावी, सही और निष्पक्ष जांच की मांग की गई। जेएनएफ
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