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Jammu News: जब तक मनमानी, उल्लंघन के सबूत न हों, कोर्ट नहीं देगा दखल
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-हाईकोर्ट ने एसएमवीडीयू का पक्ष माना, सुरक्षा एजेंसी की याचिका खारिज
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू) द्वारा सुरक्षा एजेंसी का ठेका रद्द करने और पांच लाख जमा राशि जब्त करने के मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा, मनमानी या कानून के उल्लंघन के साफ सबूत न हों, अनुबंध से जुड़े मामलों में कोर्ट दखल नहीं दे सकता। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सुरक्षा एजेंसी की याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने कहा, मामले में विवि की मनमानी या गलत मंशा साबित नहीं हो पाई है। जी एक्टिव सिक्योरिटी सर्विस कंपनी ने कोर्ट में कहा कि उसने सात और आठ सितंबर, 2021 को 70 सुरक्षाकर्मी भेजे, लेकिन पहले से काम कर रही एजेंसी बीएसएस सिक्योरिटी ने उन्हें ड्यूटी नहीं करने दी। कुछ कर्मियों ने 16 सितंबर तक काम किया। फिर विश्वविद्यालय ने ठेका खत्म कर दिया। कंपनी ने याचिका दायर कर ठेका बहाल करने, जमा राशि लौटाने और मुआवजा देने की मांग की।
विवि ने दलील दी कि कंपनी को 115 कर्मियों की तैनाती करनी थी। तय समय में 53 ही भेजे गए। ठेके की शर्त संख्या तीन के अनुसार तय संख्या पूरी नहीं होती है तो ठेका रद्द कर जमा राशि जब्त की जा सकती है। कंपनी को नोटिस देकर चेतावनी भी दी थी। जेएनएफ
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी (एसएमवीडीयू) द्वारा सुरक्षा एजेंसी का ठेका रद्द करने और पांच लाख जमा राशि जब्त करने के मामले में फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा, मनमानी या कानून के उल्लंघन के साफ सबूत न हों, अनुबंध से जुड़े मामलों में कोर्ट दखल नहीं दे सकता। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सुरक्षा एजेंसी की याचिका खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने कहा, मामले में विवि की मनमानी या गलत मंशा साबित नहीं हो पाई है। जी एक्टिव सिक्योरिटी सर्विस कंपनी ने कोर्ट में कहा कि उसने सात और आठ सितंबर, 2021 को 70 सुरक्षाकर्मी भेजे, लेकिन पहले से काम कर रही एजेंसी बीएसएस सिक्योरिटी ने उन्हें ड्यूटी नहीं करने दी। कुछ कर्मियों ने 16 सितंबर तक काम किया। फिर विश्वविद्यालय ने ठेका खत्म कर दिया। कंपनी ने याचिका दायर कर ठेका बहाल करने, जमा राशि लौटाने और मुआवजा देने की मांग की।
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विवि ने दलील दी कि कंपनी को 115 कर्मियों की तैनाती करनी थी। तय समय में 53 ही भेजे गए। ठेके की शर्त संख्या तीन के अनुसार तय संख्या पूरी नहीं होती है तो ठेका रद्द कर जमा राशि जब्त की जा सकती है। कंपनी को नोटिस देकर चेतावनी भी दी थी। जेएनएफ
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