लुप्त होते वन्यजीवों को कारपोरेट सेक्टर का सहारा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लुप्त होते दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कारपोरेट सेक्टर का साथ लेने की तैयारी की जा रही है। वन मंत्रालय कश्मीर के हंगुल और लद्दाख के बर्फीले तेंदुओं सहित अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करती 14 वन्य प्रजातियों को बचाने के लिए नई सोच पर विचार कर रहा है।
इन्हें बचाने के लिए चलाए जाने वाले प्रोजेक्टों में कारपोरेट जगत को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि अभी इसकी अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की जा रही। लेकिन बताया जा रहा है कि इसकी पहल शुरू कर दी गई है।
सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्ष अगस्त माह और इस वर्ष फरवरी माह में पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग की सात कंपनियों ने मंत्रालय से संपर्क कर इसमें हाथ बढ़ाने की पहल की। इसके बाद मंत्रालय ने टाटा, आईटीसी, रियो, टिंटो, सेसा स्टेरलाइट और विप्रो जैसी 19 कंपनियों को इंडिया बिजनेस एंड बायोडायवर्सिटी इनीशिएटिव (आईबीबीआई) के तहत अपने साथ जुड़ने को कहा।
इनमें से चार कंपनियों ने आगे हाथ बढ़ाया। सूत्रों का कहना है कि आयन एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन ने लद्दाख के बर्फीले तेंदुओं को बचाने की ओर हाथ बढ़ाया। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आईबीबीआई के तहत एक प्लेटफार्म बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि निजी कंपनियों को अपने साथ जोड़ कर इस कवायद को आगे बढ़ाया जाए।
अपने दम पर इन प्रजातियों को बचाएंगे
जम्मू कश्मीर सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्री, बाली भगत का कहना है कि अभी तक केंद्र की तरफ से ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं दी गई। विभाग कोशिश कर रहा है कि अपने दम पर इन प्रजातियों को बचाया जाए। लेकिन भविष्य में यदि ऐसी कोई योजना या फिर निजी कंपनियां इसके लिए आगे आती हैं, तो विभाग उनके साथ मिलकर काम करेगा।
हंगुल की स्थिति
श्रीनगर से सटे जवरबान क्षेत्र के 141 किलोमीटर लंबी दच्छीगाम नेशनल पार्क में हंगुल की मौजूदगी है। एक समय कश्मीर में हंगुल की संख्या हजारों में थी। 1940 के दौरान इनकी संख्या 3000 से 5000 के बीच थी। वर्ष 2008 में हुए सेंसिज में इनकी संख्या 160 बताई गई। हालांकि 2010 में फिर से एक सेंसिज हुआ। इसमें इनकी संख्या 200 तक पहुंची। इनकी संख्या घटन के बाद इंडिया रेड डाटा बुक में खतरे में फंसी 14 दुर्लभ प्रजातियों में इनको शामिल किया गया।
लद्दाख में सबसे अधिक
भारत का लद्दाख ही एक मात्र ऐसा क्षेत्र है, यहां बर्फीले तेंदुए सबसे अधिक है। देश के उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश में बर्फीले तेंदुए होते हैं। देश में इनकी संख्या 400 से 700 के बीच है। इनमें से 60 फीसदी लद्दाख में है। लद्दाख खित्ते के वन्यजीव विभाग के अधिकारी, जिगमेत तपका का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से इन बर्फीले तेंदुओं को बचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिससे इनका संरक्षण किया जा रहा है।