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भूखे रहने से बेहतर है घर कूच किया जाए
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अखनूर। कोरोना के चलते प्रवासी मजदूरों को खानपान का संकट है। ऐसे में कई मजदूर परिवार पलायन करने लगे हैं। मजदूरों ने सरकार से मांग की है कि घर वापसी के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
शुक्रवार को क्षेत्र के कई जगहों से प्रवासी मजदूरों ने कस्बे से जाना शुरू कर दिया। पैदल ही जम्मू की तरफ कूच कर दिया। इसमें कुछ बिहार, झारखंड सहित अन्य राज्य के लोग थे। पलायन कर रहे मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते खाने कमाने का संकट है। जब से लॉकडाउन हुआ है तभी से दो बार ही राशन मिला है। इस के बाद राशन नहीं मिला। भूखे रहने से बेहतर है घर कूच किया जाए। उन्होंने बताया कि हमें पता है घर पहुंचने में कई दिन लगेंगे, मगर इतना तो है घर जाने पर खाने को तो कुछ मिलेगा। प्रशासन से कई बार गुहार लगाई की राशन दिया जाए, मगर इसके लिए दस लोगों पर मात्र दस किलो राशन मिला है। वह भी एक सप्ताह के लिए, ऐसे में कैसे जिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घर वापसी ही एक विकल्प बचा है ताकि इस घड़ी पर घर पहुंचा जाए। उन्होंने बताया कि पहले तो काम मिल जाता था, मगर अब एक हफ्ते से मजदूरी नहीं मिलने पर भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है। प्रशासन कोई सहयोग नहीं कर रहा।
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शुक्रवार को क्षेत्र के कई जगहों से प्रवासी मजदूरों ने कस्बे से जाना शुरू कर दिया। पैदल ही जम्मू की तरफ कूच कर दिया। इसमें कुछ बिहार, झारखंड सहित अन्य राज्य के लोग थे। पलायन कर रहे मजदूरों ने बताया कि लॉकडाउन के चलते खाने कमाने का संकट है। जब से लॉकडाउन हुआ है तभी से दो बार ही राशन मिला है। इस के बाद राशन नहीं मिला। भूखे रहने से बेहतर है घर कूच किया जाए। उन्होंने बताया कि हमें पता है घर पहुंचने में कई दिन लगेंगे, मगर इतना तो है घर जाने पर खाने को तो कुछ मिलेगा। प्रशासन से कई बार गुहार लगाई की राशन दिया जाए, मगर इसके लिए दस लोगों पर मात्र दस किलो राशन मिला है। वह भी एक सप्ताह के लिए, ऐसे में कैसे जिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घर वापसी ही एक विकल्प बचा है ताकि इस घड़ी पर घर पहुंचा जाए। उन्होंने बताया कि पहले तो काम मिल जाता था, मगर अब एक हफ्ते से मजदूरी नहीं मिलने पर भूखे रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है। प्रशासन कोई सहयोग नहीं कर रहा।
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