{"_id":"5ee142cf8ebc3e431a3b1b10","slug":"corona-virous-jammu-city-news-jmu211811280","type":"story","status":"publish","title_hn":"चिकित्सा कर्मियों के संक्रमित होने से खौफ बढ़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चिकित्सा कर्मियों के संक्रमित होने से खौफ बढ़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। चिकित्सा कर्मचारियों के लगातार कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से चिकित्सीय स्टाफ के साथ मरीजों की चिंता बढ़ी है। अब मरीज सरकारी अस्पतालों में जाने से परहेज कर रहे हैं। संभाग के प्रमुख जीएमसी जम्मू में ही कई डाक्टर और चिकित्सा कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। यही नहीं इमरजेंसी, आरथो विभाग में 10 से अधिक मरीज भी संक्रमित मिल चुके हैं। निजी क्षेत्र में भी कोविड टेस्ट की सुविधा न होने से मरीजों की परेशानी और बढ़ गई है। उन्हें सरकारी अस्पतालों के साथ निजी क्षेत्र में उचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि इमरजेंसी मामलों को प्राथमिकता पर देखा जा रहा है।
जम्मू संभाग के विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में अब तक 35 से अधिक चिकित्सा कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इसी तरह कश्मीर में भी यह आंकड़ा तीस से ऊपर है, जिसमें दस के करीब डाक्टर हैं। चिकित्सा स्टाफ के भी संक्रमण की चपेट में आने से सरकारी अस्पतालों में अधिक एहतियात बरती जा रही है। लेकिन कोविड महासंकट के बीच चिकित्सा स्टाफ के साथ मरीजों के लिए परेशानी बढ़ी है।
जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी में वर्तमान में 30 या इससे कुछ अधिक मरीजों को ही देखा जा रहा है। ये वे मरीज होते हैं जिन्होंने फोन पर अप्वाइंटमेंट लिया होता है, जबकि सैकड़ों अन्य मरीज रोजाना ओपीडी से वंचित हो रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते थे। कोविड संकट के बीच एसोसिएटेड अस्पताल भी मरीजों की भीड़ को संभालने में सक्षम नहीं हैं।
विज्ञापन
ओपीडी में संक्रमित मामलों के पहुंचने की भी आशंका बढ़ी है। इसी तरह जो मरीज निजी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाएं पाना चाहते हैं, उन्हें भी इससे वंचित रहना पड़ रहा है। खासतौर पर आपरेशन के मामलों में निजी क्षेत्र हाथ नहीं डाल रहे हैं। आपरेशन से पहले मरीज का लगभग कोविड टेस्ट करवाया जा रहा है, लेकिन निजी क्षेत्र में कोविड टेस्ट की सुविधा न होने से मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
दूरी बनाए रहते हैं डाक्टर
जम्मू। कोरोना संक्रमण ने इंसान को इंसान से दूर कर दिया है। मरीजों की शिकायत बढ़ी है कि सरकारी और निजी स्तर पर जब वे डाक्टरों को दिखाने जा रहे हैं तो उनसे वे दूरी बनाए रखते हैं। यहां तक की मरीज को संतोषजनक करने के लिए उन्हें हाथ तक नहीं लगाया जाता है। उनसे मौखिक तौर पर ही बीमारी के बारे में सुनकर दवा दी जा रही है। हालांकि डाक्टरों के लिए भी यह मजबूरी बन गया है कि उनके पास पहुंचने वाले मरीजों से वे दूरी बनाकर रखें। सरकारी और निजी क्षेत्र में सीधे तौर पर जो मरीज पहुंच रहे हैं उनके कोविड नेगेटिव होने की प्राइमरी स्तर पर कोई जानकारी नहीं होती है।
विज्ञापन
जम्मू संभाग के विभिन्न चिकित्सा केंद्रों में अब तक 35 से अधिक चिकित्सा कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इसी तरह कश्मीर में भी यह आंकड़ा तीस से ऊपर है, जिसमें दस के करीब डाक्टर हैं। चिकित्सा स्टाफ के भी संक्रमण की चपेट में आने से सरकारी अस्पतालों में अधिक एहतियात बरती जा रही है। लेकिन कोविड महासंकट के बीच चिकित्सा स्टाफ के साथ मरीजों के लिए परेशानी बढ़ी है।
विज्ञापन
जीएमसी और एसोसिएटेड अस्पतालों में सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी में वर्तमान में 30 या इससे कुछ अधिक मरीजों को ही देखा जा रहा है। ये वे मरीज होते हैं जिन्होंने फोन पर अप्वाइंटमेंट लिया होता है, जबकि सैकड़ों अन्य मरीज रोजाना ओपीडी से वंचित हो रहे हैं। सुपर स्पेशियलिटी ओपीडी में रोजाना सैकड़ों मरीज पहुंचते थे। कोविड संकट के बीच एसोसिएटेड अस्पताल भी मरीजों की भीड़ को संभालने में सक्षम नहीं हैं।
विज्ञापन
ओपीडी में संक्रमित मामलों के पहुंचने की भी आशंका बढ़ी है। इसी तरह जो मरीज निजी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाएं पाना चाहते हैं, उन्हें भी इससे वंचित रहना पड़ रहा है। खासतौर पर आपरेशन के मामलों में निजी क्षेत्र हाथ नहीं डाल रहे हैं। आपरेशन से पहले मरीज का लगभग कोविड टेस्ट करवाया जा रहा है, लेकिन निजी क्षेत्र में कोविड टेस्ट की सुविधा न होने से मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
दूरी बनाए रहते हैं डाक्टर
जम्मू। कोरोना संक्रमण ने इंसान को इंसान से दूर कर दिया है। मरीजों की शिकायत बढ़ी है कि सरकारी और निजी स्तर पर जब वे डाक्टरों को दिखाने जा रहे हैं तो उनसे वे दूरी बनाए रखते हैं। यहां तक की मरीज को संतोषजनक करने के लिए उन्हें हाथ तक नहीं लगाया जाता है। उनसे मौखिक तौर पर ही बीमारी के बारे में सुनकर दवा दी जा रही है। हालांकि डाक्टरों के लिए भी यह मजबूरी बन गया है कि उनके पास पहुंचने वाले मरीजों से वे दूरी बनाकर रखें। सरकारी और निजी क्षेत्र में सीधे तौर पर जो मरीज पहुंच रहे हैं उनके कोविड नेगेटिव होने की प्राइमरी स्तर पर कोई जानकारी नहीं होती है।