तो आपके नोटों पर छपी दिख सकती है डोगरी भाषा
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एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को निर्देश दिए कि यदि संभव हो तो करेंसी नोटों और इंडियन पोस्टल आर्डर पर डोगरी भाषा का भी उपयोग करने के आग्रह पर विचार किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश बंसी लाल भट की खंडपीठ ने एडवोकेट बीआर मन्हास की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि यह संभव हो तो चार सप्ताह के अंदर आवश्यक कार्यवाही की जाए।
कई वकीलों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और संविधान जनता को अपनी भाषा उपयोग करने का अधिकार देता है। यही कारण है कि विभिन्नता में अखंडता देश की खूबसूरती है।
आठवीं अनुसूची में डोगरी सहित 22 भाषाओं को शामिल
संविधान की आठवीं अनुसूची में डोगरी सहित 22 भाषाओं को शामिल किया गया है। रिजर्व बैंक आफ इंडिया की ओर से जारी होने वाले नोटों में उल्लेखनीय भाषाओं में डोगरी को भी शामिल किया जाना चाहिए।
लोग चाहते हैं कि इस भाषा का उपयोग नोटों के अलावा पोस्टल आर्डर में उपयोग किया जाए। यह तर्क दिया जा रहा है कि नोटों पर डोगरी भाषा का उल्लेख नहीं होने से भेदभावपूर्ण रवैये की बू आ रही है। उनका कहना है कि चूंकि यह संविधान की आठवीं सूची में शामिल है, इसलिए इसका भी उपयोग होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि साक्षरता दर में लगातार तेजी से वृद्धि होने के कारण नोटों पर अंकित मूल्य किसी खास भाषा में होना ज्यादा महत्व नहीं रखता। हिंदी और इंग्लिश ही इसके लिए पर्याप्त है।
चूंकि नोटों में स्थानाभाव के कारण हो सकता है कि सभी भाषाओं का नोटों पर उल्लेख होना संभव न हो। इसलिए अदालत याचिका में दिए गए तर्क को खारिज करती है। अदालत ने कहा कि विभिन्न भाषाओं के पुन: वर्गीकरण और एक भाषा में किसी मातृभाषा को शामिल करना अलग मुद्दा है।