फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगने के बाद शुरू हुई सियासी बयानबाजी, कांग्रेस ने कहा- यह अन्याय है
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जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रवींद्र शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगाना दुर्भाग्यपूर्ण और अन्याय है। यह सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। दुनिया में सबसे बड़े भारत के लोकतंत्र में यह कदम गलत संदेश देगा। केंद्र व राज्य सरकार लोकतंत्र की भावनाओं का सम्मान करते हुए खासतौर पर विपक्षी दलों के नेताओं के लोकतांत्रिक और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने का काम करे।
शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के राज्यसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को जम्मू-कश्मीर का दौरा करने की अनुमति देने के फैसले का स्वागत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य को अपने गृह क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में आने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि शायद लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह पहली बार हुआ है। भाजपा विपक्षी दलों के नेताओं पर असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक हथकंडे अपना रही है। भाजपा विपक्ष मुक्त भारत पर काम कर रही है, जबकि वह यह भूल रही है कि विपक्ष भी लोगों की आवाज होता है।
भाजपा बदले की भावना से ऐसी कार्रवाई कर रही- नेशनल कांफ्रेंस
नेशनल कांफ्रेंस(नेका) के वरिष्ठ नेता अजय सडोत्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगाने की कड़ी भर्त्सना की है। उन्होंने कहा कि डॉ. फारूक कई बार केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। 1966 में आतंकवाद के दौर में भी वह राष्ट्र हित के लिए लड़ते रहे। लेकिन भाजपा बदले की भावना से ऐसी कार्रवाई कर रही है। वह जम्मू-कश्मीर के प्रमुख विपक्षी दल के नेता हैं।
नेकां प्रवक्ता ने कहा कि पिछले 43 दिन से पार्टी नेताओं पर पाबंदियां लगाई गई हैं, जिससे अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। इन परिस्थितियों में जम्मू-कश्मीर को मुसीबत की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में डॉ. अब्दुल्ला के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ेगा। भाजपा को अपनी नीतियों में बदलाव लाना चाहिए।