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डोगरी साहित्य पर सम्मेलन: भाषाओं के सम्मान से ही राष्ट्र को मिलेगा गौरव- SMVDU वीसी
Sat, 19 Nov 2022 02:04 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Sat, 19 Nov 2022 02:04 PM IST
सार
श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय में साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से डोगरी साहित्य पर दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें 20वीं और 21वीं सदी के डोगरी उपन्यास का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया।
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SMVDU Katra
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जब तक हम अपनी भाषाओं का सम्मान नहीं करेंगे तब तक हम अपनी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्र का सम्मान नहीं कर पाएंगे। यह बात श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) के कुलपति पद्मश्री प्रोफेसर आरके. सिन्हा ने डोगरी साहित्य पर आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने मातृभाषा में संचार की आवश्यकता पर जोर दिया।
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धर्मनगरी कटड़ा से 10 किलोमीटर दूर ककड़याल में श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय में साहित्य अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से डोगरी साहित्य पर दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें 20वीं और 21वीं सदी के डोगरी उपन्यास का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया।
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साहित्य अकादमी के उप सचिव एन. सुरेश बाबू ने शैक्षणिक गतिविधियों से परे भाषाओं को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डोगरी जम्मू क्षेत्र की समृद्ध और जीवंत संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है। अकादमी अच्छी गुणवत्ता वाले साहित्य के लेखन, प्रकाशन और प्रचार को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है।
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डोगरी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता मोहन सिंह ने डोगरी लेखकों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि लोगों को जोड़ने के लिए भाषाएं आवश्यक हैं। एसएमवीडीयू के रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह जम्वाल ने डोगरी भाषा को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जम्मू और कश्मीर की सीमाओं से परे डोगरी के पोषण, प्रचार और परिचय में प्रतिष्ठित डोगरी लेखकों के निस्वार्थ योगदान की प्रशंसा की।
पद्मश्री से सम्मानित नरसिंह देव जम्वाल, देश बंधु डोगरा नूतन और ओम गोस्वामी सहित डोगरी के अन्य प्रसिद्ध लेखकों और कवियों ने सम्मेलन के पहले सत्र के दौरान अपने उपन्यासों के बारे में बात की। पहले दिन के दूसरे सत्र में राजिंदर रांझा, सुनीता भड़वाल व जगदीप दुबे ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध डोगरी लेखक प्रकाश प्रेमी ने की।
एसएमवीडीयू के स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज के डीन वी. के. भट्ट ने सम्मेलन के पहले दिन के समापन पर धन्यवाद प्रस्तुत किया। स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस एंड लिटरेचर की विभागाध्यक्ष ईशा मल्होत्रा, डॉ. राकेश थुस्सू और डॉ. कामिनी पठानिया, बोर्ड ऑफ कल्चरल एक्टिविटीज ने कार्यक्रम का समन्वय किया।