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गलवां घाटी में संचार सेवाएं बहाल, पटरी पर लौट रहा जनजीवन

Sat, 18 Jul 2020 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा ओमपाल संब्याल, लेह/जम्मू
ओमपाल संब्याल, लेह/जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 18 Jul 2020 06:24 AM IST
सार

  • एलएसी पर बहाल होने लगीं संचार सेवाएं, 3 घंटे छोड़ा जा रहा सिग्नल
  • गलवां घाटी समेत अग्रिम गांवों में तेजी से पटरी पर लौट रहा जनजीवन
  • पैंगोंग के फिंगर इलाके में अभी भी सैन्य जमावड़ा और पाबंदियां बरकरार
  • पैंगोंग झील से सटी लुकुंग अग्रिम चौकी पर पहुंचे थे रक्षा मंत्री राजनाथ

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Communication services restored in Galvan Valley, life back on track
लद्दाख की गलवां घाटी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के बीच पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे को जमीनी हालात में सुधार से जोड़कर देखा जा रहा है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री पैंगोंग झील से सटे लुकुंग गांव में बनी अग्रिम चौकी पर पहुंचे थे। 

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पैंगोंग क्षेत्र के छोड़ अन्य सभी इलाकों में जीवन तेजी से पटरी पर लौटने लगा है। करीब दो माह बाद इन गांवों में संचार सेवाएं भी बहाल होने लगी हैं। पैंगोंग के फिंगर क्षेत्र से सटे इलाके को छोड़ एलएसी के अधिकांश गांवों में कुछ समय के लिए मोबाइल सिग्नल छोड़ा जा रहा है।
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दरअसल, पांच-छह मई को दोनों तरफ की सेनाओं के बीच झड़प के बाद एलएसी पर तेजी से सैन्य जमावड़ा होने लगा था। मई के मध्य में एहतियातन ब्लैकआउट और संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया था। संचार सेवाएं ठप होने से दो दर्जन से अधिक गांवों की करीब चार हजार आबादी का संपर्क पूरी तरह से कट गया। 
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प्रधानमंत्री के बाद रक्षा मंत्री के दौरे के बीच एलएसी के हालात पर तंगसे के पार्षद ताशी नामग्याल ने बताया कि गलवां घाटी व सटे क्षेत्रों में हालात पूरी तरह से सामान्य हो गए हैं, लेकिन पैंगोंग झील के आसपास अभी भी सैन्य जमावड़ा और पाबंदियां जारी हैं। 

फिंगर क्षेत्र की पहाड़ियों से चीनी सैनिकों की मूवमेंट पहले नजर आती थी। अब वह नजर नहीं आ रही है। पैंगोंग झील से सटे इलाके को छोड़ ज्यादातर अग्रिम इलाकों में रोजाना तीन घंटे के लिए मोबाइल सिग्नल छोड़ा जा रहा है। इससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।

चरवाहों-युवाओं को बंधी आस
एलएसी पर हालात सुधरने से चरवाहों और स्थानीय युवाओं को आस बंधी है। चरवाहे चाहते हैं कि उन्हें एलएसी पर चरागाहों पर मवेशी लेकर जाने दिया जाए। तनाव कम होने से चरवाहों को गतिविधियां जितनी बढ़ेंगी, अग्रिम इलाकों की उतनी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। वहीं, स्थानीय युवा चाहते हैं कि उन्हें पर्यटन स्थल पर सीजनल कारोबार करने की सुविधाएं दी जाएं। पैंगोंग झील में हर साल बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। 


स्टेंजिन टाकपा, स्टेंजिन नुरबू, लोबसंग टंडार, थिनलेस अंगचुक, सेवांग ग्यालसन और नामग्याल दोरजे समेत करीब 30 युवाओं ने बीते वर्ष पैंगोंग झील किनारे पर्यटन कारोबार के लिए टेंट लगाए थे। युवाओं का आरोप है कि इन्हें प्रशासन ने हटवा दिया था। उनका तर्क है कि यहां पर्यटन को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन के साथ एलएसी की निगरानी को भी मजबूत किया जा सकता है।

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