पुलवामा में दूसरे दिन भी हिंसक प्रदर्शन, दर्जन भर घायल
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दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के काकपोरा इलाके में सोमवार को हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। सुबह से ही प्रदर्शन का दौर शुरू हो गया था। उग्र युवाओं ने क्षेत्र के पुलिस पोस्ट पर पत्थर भी बरसाए।
हिंसक प्रदर्शन के दौरान करीब एक दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होता देख सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे। इस बीच राज्यपाल ने पुलवामा मामले की विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी से तलब की है।
उन्होंने तय समय सीमा में मजिस्ट्रेटी जांच भी पूरा करने को कहा है। अस्पताल में भर्ती घायलों को उपचार तथा घायलों व पीड़ित परिवार को सहायता देने की कमिश्नर को हिदायत दी।
रेलवे ट्रैक के करीब पथराव
जानकारी के अनुसार जिले में कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू होने के बावजूद लोग कई जगहों पर सड़क पर उतर आए। उन्होंने दो नागरिकों की मौत पर रोष जताते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान करीब एक दर्जन लोग घायल हुए हैं।
इनमें से तीन युवा उस समय चोटिल हुए जब वह रेलवे ट्रैक के करीब पथराव कर रहे थे। घायलों में से एक को श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल पहुंचाया गया।
गौरतलब है कि रविवार को इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकी की मौत को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर बितर करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा आंसू गैस के गोले दागे गए थे और हवाई फायरिंग की गई थी। इस दौरान कथित तौर पर दो नागरिकों की मौत पर सोमवार को दिन भर हालात तनावपूर्ण बने रहे।
दो नागरिकों की मौत मामले में जांच के आदेश
पुलवामा जिले के काकपोरा में एक महिला समेत दो नागरिकों की मौत मामले में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट शाहबाज अहमद मिर्जा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो 15 दिन के भीतर उन परिस्थितियों का पता लगाएंगे, जो दो नागरिकों की मौत और घायल होने वालों के पीछे जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा दो नागरिकों की मौत और अन्य के घायल होने पर नाराजगी है। वहीं नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने कहा कि सिर्फ मजिस्ट्रेटी जांच पर्याप्त नहीं, मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। उन्होंने कहा कि नेकां चाहती है कि घटना के दोषी को दंडित किया जाए।
सीआरपीएफ के दक्षिणी कश्मीर के डीआईजी (ऑप्स) एएस नेगी ने कहा कि जो चीज गलत है, वहां जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने रविवार की घटना में सीआरपीएफ की किसी भी प्रकार की भागीदारी को सिरे से नकारा। कहा कि जो घटना हुई, उसमें उनका कोई हाथ नहीं।