कृत्रिम झील की समीक्षा करेगी दिल्ली की टीम
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तवी पर कृत्रिम झील परियोजना को मुख्यमंत्री एवं पीडीपी नेता अव्यवहारिक और भाजपा नेता एवं पीएचई, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री चाहे व्यवहारिक बता रहे हों, लेकिन 69.70 करोड़ की राशि की कृत्रिम झील परियोजना का अब भविष्य दिल्ली से अगले सप्ताह पहुंचने वाली जल संसाधन मंत्रालय की विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम पर टिका है।
जम्मू की लाइफ लाइन तवी में पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से पूर्ववर्ती नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस गठबंधन सरकार ने साल 2010 में इस परियोजना को शुरू किया। पिछले पांच साल में परियोजना पर 55 करोड़ की राशि खर्च कर करीब 85 फीसदी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
सितंबर 2014 में तवी में आई बाढ़ में परियोजना के गेट लगाने के लिए तैयार पिलरों में से कुछ अपनी जगह से खिसक कर टेढ़े हो गए और चौथे पुल के कुछ हिस्से को भी नुकसान पहुंचा। इसके बाद परियोजना का निर्माण कार्य धीमा पड़ा है।
कृत्रिम झील परियोजना में कमियों मसलन पिलर खड़े करने से पूर्व तवी के दोनों ओर दीवार आदि खड़े करने व अन्य कार्य न किए जाने और कृत्रिम झील की व्यवहारिकता पर भी सवाल उठे। माना जा रहा हैं कि जम्मू में भाजपा की साख बचाने के लिए कृत्रिम झील परियोजना पर दिल्ली से आने वाले विशेषज्ञों की टीम कुछ अहम फैसले ले सकती है।
केंद्र की मदद से बनेगी कृत्रिम झील
मौजूदा पीएचई, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री चौधरी सुखनंदन कुमार का भी कहना है कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सहयोग से कृत्रिम झील परियोजना पर निर्माण होगा।
जम्मू में एम्स को मुख्यमंत्री की ओर से खारिज करने के अलावा तवी पर कृत्रिम झील परियोजना की व्यवहारिकता पर सवाल उठने से भाजपा की प्रदेश में नेतृत्व क्षमता भी सवालों के घेरे में है। मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद जब भी कुछ कहते हैं, उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल चुप रहते हैं और दिल्ली में दुखड़ा बताने दौड़ते हैं। इससे जम्मू संभाग के लोगों की प्रतिष्ठा और गरिमा पर भी सवाल उठ रहे हैं। पैंथर्स पार्टी जम्मू के लोगों के साथ मजाक बर्दाश्त नहीं करेगी।
बलवंत सिंह मनकोटिया, अध्यक्ष नेशनल पैंथर्स पार्टी
जम्मू में एम्स की जरूरत है। कश्मीर में मौसम के हिसाब से ऐसे संस्थानों का सालभर अधिक लोग लाभ नहीं ले पाते हैं, लेकिन जम्मू में बारह माह मरीजों को यह सुविधा मिल सकेगी। कृत्रिम झील के प्रोजेक्ट को बीच में रोके जाने का कोई तुक नहीं होना चाहिए। यदि कोई तकनीकी खराबी है तो उसे तकनीकी स्तर पर ही सुधारा जाना चाहिए।
शेख बशीर अहमद, प्रांतीय सचिव नेकां