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Jammu News: पारे में गिरावट से गेहूं की फसल जलने की घटनाओं में कमी
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मौसम की मेहरबानी से इस बार गेहूं के फसल में आग लगने की घटनाओं में 75 फीसदी की कमी आई है। हर साल अप्रैल-मई में छोटी से चिंगारी से सैकड़ों कनाल खड़ी फसल जल जाती थी, लेकिन तापमान में गिरावट से इस बार राहत रही है।
जिले में इस वर्ष गेहूं के पकने पर आग लगने की 30 घटनाएं हुई हैं। इनमें आधी घटनाएं कटाई के बाद नाग में आगजनी की हैं। मतलब कि खड़ी फसल में आग की घटनाएं 15 ही हुई हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में गेहूं की खड़ी फसल में आग लगने की 75 घटनाएं हुईं। 70 घटनाएं फसल कटने के बाद नाड़ जलने की थीं। इस बार राहत की सबसे बड़ी वजह अप्रैल और मई के पहले 15 दिनों तक तापमान में कमी रहना है। जानकारी के अनुसार अप्रैल में दिन का औसत तापमान 30 डिग्री व रात में तापमान 20 से 25 डिग्री के बीच रहा। जबकि आमतौर पर अप्रैल में तापमान 40 डिग्री तक दिन का रहता है। मई के पहले दो सप्ताह में भी तापमान 40 डिग्री से नीचे था।
ज्यादा तापमान में जरा सी चिंगारी कर देती है राख
तापमान अधिक होने से आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। खासकर खेतों से गुजरने वाली तारें गर्म होकर आपस मेें टकराती हैं तो इससे निकली चिंगारियों से आग लग जाती है। इसकी चपेट में गेहूं की खड़ी फसल सबसे अधिक आती है।
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मौसम की मेहरबानी से मिला फायदा : दमकल विभाग
दमकल विभाग के उप निदेशक राज कुमार रैना का कहना है कि इस वर्ष तापमान में गिरावट से गेहूं में आग लगने की काफी कम घटनाएं हुई हैं। हालांकि, विभाग ने स्कूलों, गांव-गांव जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए हैं। पर ज्यादा फायदा तापमान में गिरावट से रहा है। सिर्फ गेहूं ही नहीं। सूखी झाड़ियों में आगजनी की घटनाएं कम हुई हैं।
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जम्मू। मौसम की मेहरबानी से इस बार गेहूं के फसल में आग लगने की घटनाओं में 75 फीसदी की कमी आई है। हर साल अप्रैल-मई में छोटी से चिंगारी से सैकड़ों कनाल खड़ी फसल जल जाती थी, लेकिन तापमान में गिरावट से इस बार राहत रही है।
जिले में इस वर्ष गेहूं के पकने पर आग लगने की 30 घटनाएं हुई हैं। इनमें आधी घटनाएं कटाई के बाद नाग में आगजनी की हैं। मतलब कि खड़ी फसल में आग की घटनाएं 15 ही हुई हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में गेहूं की खड़ी फसल में आग लगने की 75 घटनाएं हुईं। 70 घटनाएं फसल कटने के बाद नाड़ जलने की थीं। इस बार राहत की सबसे बड़ी वजह अप्रैल और मई के पहले 15 दिनों तक तापमान में कमी रहना है। जानकारी के अनुसार अप्रैल में दिन का औसत तापमान 30 डिग्री व रात में तापमान 20 से 25 डिग्री के बीच रहा। जबकि आमतौर पर अप्रैल में तापमान 40 डिग्री तक दिन का रहता है। मई के पहले दो सप्ताह में भी तापमान 40 डिग्री से नीचे था।
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ज्यादा तापमान में जरा सी चिंगारी कर देती है राख
तापमान अधिक होने से आग लगने की घटनाएं अधिक होती हैं। खासकर खेतों से गुजरने वाली तारें गर्म होकर आपस मेें टकराती हैं तो इससे निकली चिंगारियों से आग लग जाती है। इसकी चपेट में गेहूं की खड़ी फसल सबसे अधिक आती है।
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मौसम की मेहरबानी से मिला फायदा : दमकल विभाग
दमकल विभाग के उप निदेशक राज कुमार रैना का कहना है कि इस वर्ष तापमान में गिरावट से गेहूं में आग लगने की काफी कम घटनाएं हुई हैं। हालांकि, विभाग ने स्कूलों, गांव-गांव जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए हैं। पर ज्यादा फायदा तापमान में गिरावट से रहा है। सिर्फ गेहूं ही नहीं। सूखी झाड़ियों में आगजनी की घटनाएं कम हुई हैं।