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'आतंक के रोबोट' तैयार करता था बुरहान, घाटी में फैला रखी थी दहशत

Sun, 10 Jul 2016 01:41 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Sun, 10 Jul 2016 01:41 PM IST
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आतंकी बुरहान - फोटो : File Photo
22 साल के दसलखिया आतंकी बुरहान का खात्मा आतंकी तंजीमों के लिए बहुत बड़ा झटका है। पिछले तीन सालों में उसने कश्मीर में आतंक के तमाम आकाओं को पीछे छोड़कर हाईटेक आतंक का बेहद खतरनाक अध्याय लिखा था। सुरक्षा बलों के लिए उसके मन में सिर्फ और सिर्फ नफरत थी। वह घाटी के पढ़े-लिखे नौजवानों को बरगलाने में लगातार कामयाब हो रहा था।
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इसके लिए सोशल मीडिया का बड़ी चालाकी और चतुराई से इस्तेमाल कर रहा था। उसके समर्थकों ने उसके नाम की क्रिकेट टीम भी बना रखी है। बुरहान की मौत से बुरी तरह बौखालाए आतंकी और अलगाववादी संगठन अब कश्मीर का माहौल खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। सरकार और प्रशासन के लिए एक चुनौती यह भी है कि इन दिनों अमरनाथ यात्रा चल रही है।
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यात्रा को निशाना बनाए जाने के इनपुट यात्रा शुरू होने से काफी पहले से ही मिलने लगे थे। हुर्रियत की हड़ताल और बुरहान की मौत के तुरंत बाद से शुरू हुए प्रदर्शनों, मस्जिदों से की जा रही बाहर निकलने की अपील, लश्कर के बयानों और घाटी में दर्जनों आतंकी मौजूद होने की खबरें डर पैदा करती हैं। हालात की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं हैं।
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अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट कभी भी बंद हो सकता है। यात्रा मार्ग पर धारा 144 लगा दी गई है। शनिवार को गुस्साए प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की भी आशंका है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अगले कुछ दिन मुश्किल भरे होने की आशंका जताई है।

सेना की वर्दी में फोटो ख‌िचवाना बुरहान का शौक

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अपने साथ‌ियों के साथ बुरहान - फोटो : File Photo
सूत्रों की मानें तो बुरहान ने तकरीबन तीन दर्जन युवाओं का ब्रेनवाश कर उन्हें आतंक का रोबोट बना दिया है। इनमें ज्यादातर की उम्र 18 से 24 साल के बीच है। बुरहान के ग्रुप द्वारा ही पिछले दिनों पुलिस पर कई हमलों को अंजाम दिया गया। वह अपने ग्रुप के लड़कों से सुरक्षा बलों के हथियार छिनवाकर इन्हें सुरक्षा बलों के खिलाफ ही इस्तेमाल करवाता था।

वह पुलिस और प्रशासन में भी सेंध लगाने में कामयाब हो रहा था। हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की आतंकी ब्रिगेड में ज्यादातर स्थानीय युवा हैं। बुरहान के साथी सुनसान इलाके में सुरक्षा बलों की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला बोलते थे या फिर भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात पुलिस कर्मियों के हथियार छीनने की वारदातें करते थे।

आतंक के पोस्टर बॉय के रूप में अपना जाल फैलाने के लिए और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए वह सोशल मीडिया प्लेटफार्म का प्रयोग करता था। सेना की वर्दी में फोटो खिंचवाना उसका पसंदीदा शगल था। कई फोटो में उसके साथी उसे सैल्यूट करते दिख रहे हैं।

पाक‌िस्तानी आकाओं के इशारे पर नहीं करता था काम

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स्थानीय युवाओं को उकसाना बुरहान का मकदस - फोटो : File Photo
हाल ही में वायरल हुए वीडियो में वह सेना की वर्दी में साथियों के साथ हथियारों का प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। 16 साल की उम्र में आतंकी बने बुरहान का मकसद ज्यादा से ज्यादा कश्मीरी युवाओं को अपनी ब्रिगेड में शामिल कर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाना था। खास बात यह थी कि कुछ महीनों से बुरहान के तेवर बदल गए थे।

वह पाकिस्तान में बैठे हिजबुल के आकाओं के इशारों पर न चलते हुए अपना अलग ही दबदबा कायम करना चाहता था, जिसमें वह काफी हद तक कामयाब भी रहा। ज्यादातर स्थानीय युवा जो उसकी ब्रिगेड में शामिल हुए थे वे पुलिस कर्मियों की सर्विस राइफल छीनने के बाद ही शामिल हुए थे।

बुरहान के ब्रिगेड में कई पूर्व पुलिस कर्मी भी शामिल थे जो हथियार लेकर फरार हुए थे। जिनमें नसीर पंडित भी था। यह पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी के घर सुरक्षा कर्मी के तौर पर तैनात था और बाद में वह एक मुठभेड़ में मारा भी गया था।

बुरहान ने अपना कार्यक्षेत्र दक्षिण कश्मीर में त्राल के जंगल के ऊपरी इलाकों में हाइडआउट बनाकर रखा था। उसके ब्रिगेड में शामिल होने वाले युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण भी इन्हीं पहाड़ी इलाकों में दिया जाता था।

हाल ही में पुलवामा के एक घर में उसके साथियों के हाइडआउट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया था। इसमें किताबों की आलमारी के पीछे भारी मात्रा में छिपाए गए हथियार बरामद किए गए थे। विधानसभा के चुनाव के दौरान भी उसने बहिष्कार की धमकी थी। बुरहान को अपने लोकल नेटवर्क की भी पूरी मदद हासिल थी। 
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