बीएसएफ की अभेद्य निगरानी से बचने के लिए सुरंग का हथकंडा, घुसपैठ के पुराने रूट फिर हुए संवेदनशील
अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की हरकत पर नजर रखने के लिए सीमा सुरक्षा बल ने अत्याधुनिक उपकरणाें के साथ सुरक्षा ग्रिड तैयार किया है। सीआईबीएमएस यानी कॉम्प्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम से आतंकी घुसपैठ के मंसूबे लगातार नाकाम हो रहे हैं। यह सिस्टम किसी भी मौसम में मानव हलचल को पकड़ लेता है। कई बार आतंकी घुसपैठ की कोशिशों को इसी सिस्टम की मदद से ऐन मौके पर नाकाम कर दिया गया है। यही वजह है कि पाकिस्तान सुरंगें खोदकर आतंकियों को इस पार धकेलने की कोशिशें कर रहा है।
सीमा प्रहरियों की दिक्कतों को देखते हुए मैनुअल पेट्रोलिंग के साथ सीआईबीएमएस से भी निगरानी की जा रही है। अत्याधुनिक उपकरणाें से लैस यह सिस्टम बेहद कारगर है, जिससे बौखलाया पाकिस्तान सुरंगें खोदने के हथकंडे अपना रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सुरंगें खोदने के लिए पाकिस्तान पेशेवर इंजीनियरों की मदद ले रहा है। इसी वजह से सैकड़ों मीटर लंबी सुरंगों को खोदने पर भी इसकी भनक नहीं लग रही। हालांकि बीएसएफ के एंटी टनल अभियान ने आरएस पुरा, सांबा से लेकर हीरानगर सेक्टर तक सुरंगों को खोजने में सफलता हासिल की है।
हीरानगर में पहली सुरंग, घुसपैठ के पुराने रूट फिर हुए संवेदनशील
हीरानगर सेक्टर से गुजरने वाले दरियाई नाले कई बार घुसपैठ के लिए इस्तेमाल हो चुके हैं। पिछले दो दशक से यह रूट संवेदनशील बने हुए हैं, लेकिन लंबे समय बाद हीरानगर सेक्टर में आतंकी घुसपैठ की बड़ी कोशिश सामने आई है। सुरंग से घुसपैठ की कोशिश का यह पहला मामला है। इससे यह रूट फिर से बेहद संवेदनशील हो गए हैं।
ये हैं घुसपैठ के रूट
हीरानगर सेक्टर में पहाड़पुर-मादा-भाग नाला से छब्बे चक-उज्ज राजबाग, पानसर-बसेरा नाला से हरियाचक, शाप नाला से किशनपुर, मनियारी-मंडियाल-तरनाह नाला से हाईवे, बेई नाला-जांडी नाला, तरनाह नाला-लोंडी मोड़, करोल कृष्णा-चकड़ा से चड़वाल हाईवे, चंदवां से हरिपुर-पाट्टल से हाईवे घुसपैठ के पुराने रूट रहे हैं।