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कैसे भाजपा लगाएगी गिलानी के किले में सेंध?

Wed, 19 Nov 2014 06:59 PM IST
Updated Wed, 19 Nov 2014 06:59 PM IST
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BJP's strategy increased difficulty of NC

भाजपा ने मिशन कश्मीर के तहत अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के सबसे मजबूत किले को फतह करने के लिए व्यूहरचना पूरी कर ली है। भाजपा की रणनीति से नेशनल कांफ्रेंस घबराहट बढ़ी है। भाजपा गिलानी को उनके ही हथियार से पराजित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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गिलानी के वोट बहिष्कार की अपील का कुछ क्षेत्रों पर व्यापक असर होता है। भाजपा उन क्षेत्रों पर ज्यादा जोर लगा रही है। जम्मू और लद्दाख संभाग में अपने जनाधार को अक्षुण्ण रखने के अलावा भाजपा की पूरी ताकत कम मतदान प्रतिशत वाले घाटी के विधानसभा क्षेत्रों पर है।
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हुर्रियत नेता गिलानी 1972, 1977 और 1987 में सोपोर से विधायक रहे हैं।  अब गिलानी मुख्य धारा की सियासत से अलग हैं और चुनाव की राजनीति के विरोध में हर बार मतदान का बहिष्कार करते रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सिर्फ 1052 वोट पड़े थे जिसमें से पीडीपी के मुजफ्फर हुसैन बेग को 535 मत मिले।
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बेग ने इस सीट से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। भाजपा को 12, बसपा को दो और नेशनल कांफ्रेंस को 262 मतों पर संतोष करना पड़ा था। सोपोर के कई मतदान केंद्रों पर एक भी मत नहीं पड़े। यह गिलानी के वोट बहिष्कार का असर था।

ग‌िलानी ने की चुनाव बह‌िष्कार करने की अपील

BJP's strategy increased difficulty of NC

भाजपा इस बार सोपोर की सीट पर चुनाव की घोषणा से पूर्व ही सक्रिय हो गई। इस सीट पर कश्मीरी पंडितों के लगभग 8 हजार वोट हैं। भाजपा ने इन मतदाताओं में से हर एक से व्यक्तिगत संपर्क किया है। साथ ही नए मतदाता बनाने की मुहिम भी चलाई।

इस प्रयास से कश्मीरी पंडितों के लगभग तीन हजार नए वोट जुड़े हैं। इस तरह इस सीट पर अब कश्मीरी पंडितों के लगभग 11 हजार वोट हैं। अगर गिलानी के मतदान बहिष्कार की अपील रंग लाती है तो कश्मीरी पंडितों का यह वोट बैंक बाजी पलट सकता है।

इसी आशंका ने नेशनल कांफ्रेंस की नींद उड़ा दी है। इस सीट नेकां के प्रत्याशी मोहम्मद अशरफ गनई ने बकायदा गिलानी से अपील की है कि वह मतदान बहिष्कार पर जोर नहीं दें। गनई को आशंका है कि गिलानी की अपील भाजपा के लिए वरदान हो सकती है।

उमर ने चुनाव आयोग से शिकायत का मन बनाया

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इस मुद्दे पर गंभीर है। उमर ने 1990 के बाद घाटी से बाहर गए कश्मीरी पंडितों के नाम नए वोटर के रूप में मतदाता सूची में दर्ज कराने पर आपत्ति भी जताई है। नेकां इस मामले पर चुनाव आयोग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने की मन बना रही है।

सोपोर के अलावा भाजपा को जोर गिलानी के प्रभाव क्षेत्र वाले अमीराकदल, हब्बाकदल, अनंतनाग और त्राल सीट पर है। इन सीटों पर भी कश्मीरी पंडित अच्छी संख्या में हैं।

सोपोर से भाजपा ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। यहां मतदान तीसरे चरण में है। पार्टी ने अमीराकदल से हिना भट, हब्बाकदल से मोती कौल और त्राल से सरदार अवतार सिंह को उतारा है। भाजपा की  सिख वोट बैंक पर भी नजर है।

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