पासपोर्ट मुद्दे पर भाजपा-पीडीपी के सुर अलग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हुर्रियत (ग) के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी को पासपोर्ट दिए जाने के मामले में राज्य में सियासत गरमा गई है। भाजपा गिलानी को पासपोर्ट नहीं दिए जाने पर अड़ी हुई है तो गठबंधन में उनकी सहयोगी पीडीपी इंसानियत के दायरे में रहकर गिलानी को पासपोर्ट देने का राग अलाप रही है।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है। घाटी में बुधवार को भाजपा सांसद शमशेर सिंह मन्हास ने गिलानी को पासपोर्ट तब तक नहीं दिए जाने की बात दोहराई, जब तक गिलानी भारतीय नागरिकता को नहीं स्वीकारते। भाजपा के इस बयान के बाद से ही घाटी के सियासी गलियारों में पासपोर्ट का मुद्दा फिर से गरमा गया है।
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भारत को ऐसा देश बताया जहां रिश्तों की कदर की जाती है। उन्होंने भैयादूज और रक्षाबंधन का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में रिश्तों के आधार पर त्योहार मनाए जाते हैं और बेटियों की भावनाओं की कद्र की जाती है।
गिलानी को 3 बार मिल चुका है पासपोर्ट
एक बेटी का दर्द समझते हुए गिलानी को बेटी से मिलने दिया जाना चाहिए और उन्हें पासपोर्ट दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2007, 2008 और 2011 में गिलानी को पासपोर्ट जारी हुए हैं। वे केंद्रीय गृह मंत्रालय से गिलानी, उनकी पत्नी तथा बेटे को पासपोर्ट जारी करने को कहेंगी ताकि वह सऊदी अरब में अपनी बेटी से मिल सकें।
अन्य अलगाववादी नेताओं मोहम्मद यासीन मलिक, शब्बीर शाह तथा मीरवाइज उमर फारूक के पास भी पासपोर्ट हैं और वे समय-समय पर विदेश जाते हैं। पाकिस्तान भी। उधर, पीडीपी के युवा इकाई के अध्यक्ष वहीद-उर-रेहमान पर्रा ने भी पासपोर्ट दिए जाने का समर्थन किया। उनके अनुसार पार्टी अपने फैसले पर आज भी कायम है कि गिलानी को पासपोर्ट दिया जाना चाहिए।
कहा कि हम इस मसले को इंसानियत के दायरे में रहते हुए देखते हैं। गिलानी ने पासपोर्ट की मांग किसी भारत विरोधी रैली के लिए नहीं बल्कि अपनी बेटी से मिलने के लिए की है जो इस समय बीमार है।
उमर ने कहा, पहले से फिक्स है मैच
पोसपोर्ट मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है कि यह पीडीपी और भाजपा के बीच एक फिक्स मैच है। इसे इतना बड़ा मुद्दा बनाने की क्या बात है। अगर गिलानी को 2011 में पासपोर्ट मिल सकता है तो 2015 में उन्हें पासपोर्ट से नकारने की कोई बात नहीं होनी चाहिए। ऐसे में महबूबा अचानक जेहादी बनने की कोशिश क्यों कर रहीं हैं?
केंद्र और सरकार ही तय करे गिलानी का पासपोर्ट
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज बब्बर का कहना है कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के पासपोर्ट मामले में विदेश मंत्रालय को ही निर्णय लेना है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस मामले पर जांच करे। इस संबंध में प्रावधान पहले से तय हैं। नियमों और तथ्यों के आधार पर गिलानी के मामले में भी फैसला होना चाहिए। नियमों के प्रारूप पर यदि गिलानी खरे उतरते हैं तो उन्हें पासपोर्ट दिया जाए, यदि नहीं तो नहीं।