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विवादों में गुजर गए पीडीपी-भाजपा गठबंधन के तीन माह

Tue, 02 Jun 2015 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Tue, 02 Jun 2015 12:41 AM IST
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bjp pdp coalition government completes its 3 months

वैचारिक रूप से भिन्नता वाली पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के सत्ता में सोमवार को तीन महीने पूरे हो गए। एक मार्च को शपथ ग्रहण समारोह के बाद मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की ओर से शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाकिस्तान और अलगाववादियों को श्रेय देने से उठा विवादों का बवंडर का सिलसिला हर नये दिन के साथ बढ़ता चला गया और जो आज तक जारी है। सत्ता में आने के बाद अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई पर बवाल हो गया।

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पीडीपी, भाजपा दोनों घटकों में इस मामले में बड़ी दूरी आ गई। दिल्ली तक मोदी सरकार से जवाब देते नहीं बना। आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में सफाई देनी पड़ी कि पीडीपी और मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने मसर्रत मामले में एकतरफा फैसला लिया। विवाद यहीं नही थमे। मर्सरत ने गिलानी की रैली में पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी कर दी और पाक झंडे लहराए।
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इसके बाद मसर्रत की रिहाई का तूल पकड़ते जा रहे मामले से निपटने को सरकार ने मसर्रत की गिरफ्तारी करवाई। मसर्रत की गिरफ्तारी के बाद से अब तक कभी गिलानी तो कभी यासीन मलिक और कभी शब्बीर शाह की रैलियों में पाक झंडे लहराए जाने का क्रम जारी है। गठबंधन सरकार की नई भर्ती नीति भी विवादों में रही।
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जम्मू मे एम्स न खुलना और तवी में कृत्रिम झील की व्यवहारिकता पर सवाल उठाने के मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन में जवाब बड़ा विवाद बन गया। जम्मू में कामयाब बंद से लेकर आंदोलन की सिलसिला अब तक जारी है और भाजपा से जवाब देते नहीं बन रहा। हालांकि भाजपा और पीडीपी नेता फिलहाल गठबंधन में किसी तरह की दरार से इंकार करते रहे हैं।


वादों को पूरा करना चुनौती
पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के लिए वादों को पूरा करना बड़ी चुनौती है। कश्मीरी पंडित विस्थापितों की सम्मानजनक घाटी वापसी, रिफ्यूजियों के मसलों का हल, बाढ़ प्रभावित लोगों का पुनर्वास, जम्मू को स्वतंत्र पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना, जम्मू और श्रीनगर को स्मार्ट शहर बनाना, शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार, अफस्पा को हटाने पर गौर करने से संबंधित वादे शामिल हैं।

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