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बढ़ेगी मांग : भद्रवाही राजमा को मिलेगी अब देश-विदेश में पहचान, जीआई टैगिंग के लिए स्कॉस्ट जम्मू ने किया आवेदन

Sat, 19 Feb 2022 02:25 PM IST
विमल शर्मा सतीश वालिया
सतीश वालिया Published by: विमल शर्मा Updated Sat, 19 Feb 2022 02:25 PM IST
सार

शेर-ए कश्मीर कृषि विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट) जम्मू ने भद्रवाही राजमा को जीआई टैगिंग के लिए जियोग्राफिकल इंडिकेशन विभाग दिल्ली में आवेदन किया है। यहां से आवेदन को चेन्नई स्थित पंजीकरण कार्यालय में भेजा गया है।

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Bhaderwahi Rajma will now get recognition in the country and abroad, Scost Jammu applied for GI tagging
राजमा - फोटो : getty images

विस्तार

भद्रवाह के राजमा को अब देश-विदेश में पहचान मिलेगी। आने वाले समय में किसान इसे महंगे दाम पर बेच सकेंगे। शेर-ए कश्मीर कृषि विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट) जम्मू ने भद्रवाही राजमा को जीआई टैगिंग के लिए जियोग्राफिकल इंडिकेशन विभाग दिल्ली में आवेदन किया है। यहां से आवेदन को चेन्नई स्थित पंजीकरण कार्यालय में भेजा गया है।

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सितंबर तक भद्रवाही राजमा को जीआई टैगिंग मिलेगी

अब जीआई टैगिंग पर अंतिम मुहर लगनी बाकी है। स्कॉस्ट जम्मू के अनुसार सितंबर तक भद्रवाही राजमा को जीआई टैगिंग मिलेगी। हालांकि इससे पहले भी राजमा को देश के अन्य राज्यों में भेजा जाता है। भद्रवाही राजमा खाने में स्वादिष्ट हैं। लोग इसे ज्यादा खरीदते हैं।

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जीआई टैगिंग के बाद 250 रुपये तक दाम हो सकता है

जम्मू-कश्मीर में अभी यह राजमा 200 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। जीआई टैगिंग के बाद 250 रुपये तक दाम हो सकता है। कृषि विवि के माध्यम से भी किसानों को इसकी खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रदेश में 800 हेक्टेयर भूमि में राजमा की खेती की जा रही है और इससे 1800 मीट्रिक टन के करीब पैदावार होती है। 

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विशेष पहचान वाली फसलों की होती है जीआई टैगिंग

जीआई टैगिंग ऐसी फसलों की होती है, जो विशेष क्षेत्र में अलग गुणवत्ता और पहचान रखती हैं। इससे पहले केसर की जीआई टैंगिंग की गई है। इस पर तीन चरणों में कार्यवाही होती है। पहले चरण में आवेदन, दूसरे चरण में परीक्षण आधार पर जांच होती है। तीसरे चरण में फसल को जीआई टैगिंग के लिए मंजूरी चेन्नई स्थित जियोग्राफिकल इंडिकेशन विभाग देता है। 

भद्रवाह के राजमाह को जीआई टैगिंग के लिए कार्रवाई पूरी की गई है। अब मंजूरी मिलने के बाद इसकी देश-विदेश में पहचान होगी। साथ ही जम्मू-कश्मीर के किसानों को राजमाह के अच्छे दाम मिल सकेंगे। - प्रदीप बाली, शोध निदेशक, स्कॉस्ट जम्मू

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