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जम्मू-कश्मीर में डीडीसी चुनावः पाकिस्तान को बुलेट का जवाब बैलेट से देने की तैयारी

Fri, 13 Nov 2020 02:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 13 Nov 2020 02:22 AM IST
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Ballet prepares to answer bullet from Pakistan
मतदान (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

आतंकवाद प्रभावित कश्मीर तथा सीमावर्ती जिले के लोगों ने जम्मू-कश्मीर में अशांति तथा आतंकवाद फैलाने के लिए पाकिस्तान को बुलेट का जवाब बैलेट से देने की तैयारी की है। डीडीसी चुनाव में हिस्सेदारी के लिए इन इलाकों के लोगों ने भारी संख्या में अपने नाम मतदाता सूची में दर्ज कराए हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद नए जम्मू-कश्मीर में हो रहे पहले चुनाव में गांव की सरकार अपनी मर्जी से चुनने और विकास कार्यों में भागीदारी के लिए लोग बेकरार हैं। कुल 57.64 लाख मतदाता आठ चरणों में होने वाले चुनाव में वोट डालेंगे। 

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पिछले 30 साल से अधिक समय से दहशतगर्दी का दर्द सह रहे दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा व शोपियां तथा मध्य कश्मीर के बडगाम व श्रीनगर की अवाम ने आतंकवाद पर करारा प्रहार करने के लिए डीडीसी चुनाव में अधिकाधिक संख्या में भागीदारी का मन बनाया है। यही वजह है कि इन सब जिलों में ग्रामीण इलाकों में घर-घर से मतदाता बने हैं। 
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आए दिन पाकिस्तानी गोलाबारी का दंश झेल रहे उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामुला तथा जम्मू संभाग के जम्मू, राजोरी, पुंछ, कठुआ के लोगों ने भी लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लेने की तैयारी की है। इन जिलों में भी भारी संख्या में लोग मतदाता बने हैं। खासकर बारामुला व कुपवाड़ा जिला जो आतंकवाद और पाकिस्तानी गोलाबारी दोनों से त्रस्त है। 
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जम्मू में सबसे ज्यादा और श्रीनगर में सबसे कम वोटर
डीडीसी चुनाव में जम्मू में सबसे ज्यादा 6.02 लाख मतदाता हैं, जबकि श्रीनगर में सबसे कम 34 हजार। श्रीनगर को छोड़कर सभी जिलों में आठ चरणों में चुनाव है। श्रीनगर में दो चरणों में मतदान होगा। मतदाताओं में 30.18 लाख पुरुष व 27.46 लाख महिलाएं हैं। 


पिछले तीन दशक से आतंकवाद तथा खूनखराबा का दंश झेल रहे कश्मीर के लोगों को अब यह सब रास नहीं आ रहा है। अब उन्हें विकास का मंत्र भा रहा है। युवाओं का अपने करियर तथा रोजगार के प्रति ध्यान केंद्रित है। अब युवा पत्थरबाजी करते नहीं दिख रहे। लेकिन जरूरी है कि सरकार को पूरे इंतजाम करने चाहिए ताकि लोग बेहिचक और झूमकर मतदान करें और जम्हूरियत पर विश्वास जता सकें। ताकि नए जम्मू- कश्मीर में हो रहे पहले चुनाव में बंपर वोटिंग हो सके। - डॉ. बच्चा बाबू, प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू।

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