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सरकारी डिग्री कालेज में साइबर जागरूकता का आयोजन
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आरएस पुरा। डिग्री कॉलेज में आजादी का अमृत महोत्सव के तत्वावधान में कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग, प्राचार्य प्रो. सुनील उप्पल के मार्गदर्शन में शुक्रवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। ऑनलाइन सत्र की शुरुआत प्रो. नेहा जैन, प्रभारी कॉलेज कंप्यूटर एप्लीकेशन विभाग स्वागत भाषण से हुई।
प्राचार्य ने कहा कि डिजिटल युग में इसकी प्रासंगिकता के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध ऐसा अपराध है, जिसमें कंप्यूटर उपकरणों और इंटरनेट का उपयोग शामिल है। ये अपराध एक व्यक्ति, लोगों के समूह, सरकारी और निजी संगठनों के खिलाफ किए जा सकते हैं। आमतौर पर इनका उद्देश्य किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना, शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाना या उनसे लाभ उठाना होता है। उदाहरण के लिए, मौद्रिक लाभ प्राप्त करना, घृणा और आतंक फैलाना आदि, उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से सोशल इंजीनियरिंग बनते जा रहे हैं, जहां साइबर अपराधी संसाधनों और समय को हासिल करने के लिए निवेश करते हैं।
विभाग के छात्र नेहा, अमन, रमन, विशाल, भारती, प्रीति और राहुल साइबर अवेयरनेस पर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने विभिन्न प्रकार की वातो से अवगत कराया जैसे साइबर स्टॉकिंग, साइबर फ्लैशिंग, साइबर अश्लीलता, जूस जैकिंग, फ़िशिंग जैसे दुर्भावना पूर्ण साइबर अपराध हमले, वित्तीय धोखाधड़ी आदि। वक्ताओं ने श्रोताओं को उन माध्यमों से भी अवगत कराया जिनके द्वारा नेटिजंस डिजिटल माध्यमों से जालसाजों के शिकार होने से खुद को बचा सकते हैं। छात्रों और कर्मचारियों ने वक्ताओं को उत्सुकता से सुना। इस दौरान प्रो. अमित सिंह ने कहा कि साइबर अपराध और साइबर कानून जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लेनदेन और गतिविधियों के लगभग सभी पेहलु है जिसमें इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब और साइबर स्पेस शामिल हैं।
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प्राचार्य ने कहा कि डिजिटल युग में इसकी प्रासंगिकता के बारे में जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध ऐसा अपराध है, जिसमें कंप्यूटर उपकरणों और इंटरनेट का उपयोग शामिल है। ये अपराध एक व्यक्ति, लोगों के समूह, सरकारी और निजी संगठनों के खिलाफ किए जा सकते हैं। आमतौर पर इनका उद्देश्य किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना, शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचाना या उनसे लाभ उठाना होता है। उदाहरण के लिए, मौद्रिक लाभ प्राप्त करना, घृणा और आतंक फैलाना आदि, उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से सोशल इंजीनियरिंग बनते जा रहे हैं, जहां साइबर अपराधी संसाधनों और समय को हासिल करने के लिए निवेश करते हैं।
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विभाग के छात्र नेहा, अमन, रमन, विशाल, भारती, प्रीति और राहुल साइबर अवेयरनेस पर अपनी बात रखी। वक्ताओं ने विभिन्न प्रकार की वातो से अवगत कराया जैसे साइबर स्टॉकिंग, साइबर फ्लैशिंग, साइबर अश्लीलता, जूस जैकिंग, फ़िशिंग जैसे दुर्भावना पूर्ण साइबर अपराध हमले, वित्तीय धोखाधड़ी आदि। वक्ताओं ने श्रोताओं को उन माध्यमों से भी अवगत कराया जिनके द्वारा नेटिजंस डिजिटल माध्यमों से जालसाजों के शिकार होने से खुद को बचा सकते हैं। छात्रों और कर्मचारियों ने वक्ताओं को उत्सुकता से सुना। इस दौरान प्रो. अमित सिंह ने कहा कि साइबर अपराध और साइबर कानून जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लेनदेन और गतिविधियों के लगभग सभी पेहलु है जिसमें इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब और साइबर स्पेस शामिल हैं।
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